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क्या है कलगी-तुर्रा

Sironj News - क्या है कलगी-तुर्रा कलगी-तुर्रा स्वांग एवं फड़ गायन की कला है। जिसमें कलगी और तुर्रा दो पक्ष होते हैं। कलगी...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 03:40 AM IST
क्या है कलगी-तुर्रा
क्या है कलगी-तुर्रा

कलगी-तुर्रा स्वांग एवं फड़ गायन की कला है। जिसमें कलगी और तुर्रा दो पक्ष होते हैं। कलगी पक्ष शक्ति एवं तुर्रा पक्ष ब्रह्मा का प्रतीक होता है। दोनों ही पक्षों द्वारा व्यंग्यात्मक लहजे में तरह-तरह के स्वांग गाए जाते हैं। पहले होली की दूज, रंगपंचमी तथा गणगौर पर्व पर स्वांग गायन होता था लेकिन अब सिर्फ होली के दूज पर ही सिरोंज में यह आयोजन होता है। कलगी पक्ष के स्वांग गायन में मोतीनाथ, सुनकीनाथ, धन्नानाथ तथा रामनारायण भार्गव माहिर थे। इसी तरह तुर्रा पक्ष के स्वांग गायन में हरिनारायण भार्गव, बाबूलाल श्रीवास्तव, चर्चित नाम रहे हैं। वर्तमान में शिक्षक लख्मीचंद महावर, कमलरलाल, खेमचंद, मनोज जोगी, कुंदन जोगी, बाबूलाल विश्वकर्मा, कुंदननाथ, मनोज सेन तथा रामस्वरूप राव द्वारा इस कला में स्वांग गायन किया जाता हैं।

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