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8 साल से अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहा माडल स्कूल, इस बार उनकी भी भर्ती नहीं की

शासन द्वारा जिस मंशा से माडल स्कूल शुरू किया था शासन की वह मंशा आठ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। पिछले 7 सालों से यह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 05:40 AM IST

शासन द्वारा जिस मंशा से माडल स्कूल शुरू किया था शासन की वह मंशा आठ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। पिछले 7 सालों से यह स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही संचालित हो रहा है। इस बार शासन द्वारा अभी तक अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं की है। इस वजह से इस स्कूल में शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। फोटो में जो युवक आपको का काम करता दिखाई दे रहा है वह सिरोंज में ही रहने वाला रमेश पंथी है। पिछले साल ये इसी स्कूल में अतिथि शिक्षक था। इस स्कूल के प्रभारी प्राचार्य मोहम्मद शफीक खान ने इस सत्र की शुरूआत में इसे काम-काज के लिए बुला लिया था।

रमेश पिछले एक महीने से इस आशा के साथ स्कूल में सेवा दे रहा है कि हो सकता है कि अगले इस सत्र में फिर अतिथि शिक्षक बन जाए। स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 137 छात्रों के दस्तावेजों से जुड़ा सभी काम रमेश ही कर रहा है। स्कूल में सिर्फ एकमात्र भृत्य मोहम्मद मियां ही नियमित है। स्कूल में 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। उनमें हायर सेकंडरी स्तर पर मैथ, बायोलॉजी और आर्टस संकाय की कक्षाएं भी शामिल हैं। ये हाल सिर्फ सिरोंज के माडल स्कूल के नहीं बल्कि जिले और प्रदेश में स्थित सभी माडल स्कूलों के हैं। जिले के लटेरी, बासौदा और नटेरन ब्लाक के माडल स्कूलों के भी इन दिनों यही हाल हैं। शिक्षकों के अभाव में कहीं भी पढ़ाई नहीं हो रही है। हालांकि कुछ स्कूलों में प्रतिनियुक्ति पर शिक्षक रखे गए हैं और चे काम कर रहे हैं लेकिन पूरा स्टाफ कहीं भी नहीं है।

बेहतर पढ़ाई की परिकल्पना

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को उत्कृष्ट स्कूल से भी बेहतर पढ़ाई देने के उद्देश्य से माडल स्कूलों की शुरूआत की गई थी। प्रत्येक स्कूल के लिए करीब 3 करोड़ का भवन भी बनाया गया है। बावजूद इसके आठ साल बाद भी स्कूलों में नियमित स्टाफ नहीं आ सका है। इस बीच स्कूल संचालन के लिए केन्द्र द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता भी राज्य को मिलना बंद हो गई है। खास बात यह है कि माडल स्कूलों में 9वीं में प्रवेश के लिए व्यापम परीक्षा आयोजित करता है। इस पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद ही बच्चों को प्रवेश मिलता है लेकिन स्टाफ नहीं होने की वजह से लोगों का रुझान इन स्कूलों से हट गया है।

भर्ती की प्रक्रिया चल रही है

अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है यह प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी हो जाएगी। इसके बाद माडल स्कूलों में नियमिति अध्यापन भी शुरू हो जाएगा। फिलहाल अन्य स्कूलों के शिक्षकों की व्यवस्था इन स्कूलों में की गई है। एचएन नेमा डीईओ विदिशा।

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