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प्रशासन की उदासीनता के चलते चक्काजाम हो रहा आम, नहीं करते कोई सख्त कार्रवाई

सवाल: जिम्मेदार कार्रवाई से डरते हैं या कागजी कार्य से बचते हैं भास्कर संवाददाता| सिरोंज नगर में चक्काजाम...

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 06:15 AM IST
सवाल: जिम्मेदार कार्रवाई से डरते हैं या कागजी कार्य से बचते हैं

भास्कर संवाददाता| सिरोंज

नगर में चक्काजाम लगाना आम बात हो गई है। छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लोग आवेदन और निवेदन करने के बाद सीधे चक्काजाम करने लगे हैं। मौके पर पहुंचने वाले नेता लोगों को समझाइश देने की बजाय चक्काजाम में शामिल हो जाते हैं और प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ समझाइश तक सीमित रहती है। चक्काजाम से परेशान नागरिक सिर्फ मन ही मन बुदबुदाकर रह जाते हैं।

तीन महीने से नगर में चक्काजाम लगाना आम बात हो गई है। इस मामले में किसान ज्यादा आगे हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान एलबीएस कालेज, रिंग रोड और मंडी बायपास रोड पर किसानों ने हर दूसरे दिन चक्काजाम किया। जब भी उन्हें समस्या दिखाई दी वे चक्काजाम शुरू कर देते हैं। सोमवार को भी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सामने किसानों ने भुगतान नहीं होने की बात कहते हुए हंगामा कर चक्काजाम शुरू कर दिया। करीब एक घंटे तक लोग परेशान हुए। दोपहिया वाहन चालक तो गलियों से होते हुए गंतव्य तक पहुंच गए लेकिन चार पहिया वाहनों के पहिए एक घंटे तक थमे रहे। हर बार की तरह पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों, बैंक प्रबंधन के बीच चर्चा करवाकर जाम खुलवा कर वापस लौट गई। पुलिस ने किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की। सोमवार को मंडी बायपास रोड पर लगे चक्काजाम में फंसे अनस खान ने बताया कि लोग जब चाहे तब सड़क पर आवागमन रोक देते हैं। जनता परेशान होती रहती है लेकिन हर बार जिम्मेदार कार्रवाई करने से कतराते हैं। ऐसा लगता है कि या तो सब नेताओं से डरते हैं या फिर कागजी कार्रवाई से बचना चाहते हैं। दैनिक भास्कर ने चक्काजाम को लेकर राजनीतिक दलों, किसानों और अधिकारियों से चर्चा की तो सभी ने चक्काजाम को अनुचित बताया तथा चक्काजाम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही।

विरोध का यह तरीका गलत है: