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ग्रहण को लेकर आम दिनों की तरह ही रहे आदिवासी

भास्कर संवाददाता | सोहागपुर सुपरमून से रेड ब्लूमून तक के पूर्ण चंद्रग्रहण को लेकर ग्रामीण अंचल में रहने वाले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:40 AM IST

भास्कर संवाददाता | सोहागपुर

सुपरमून से रेड ब्लूमून तक के पूर्ण चंद्रग्रहण को लेकर ग्रामीण अंचल में रहने वाले आदिवासियों पर क्या प्रभाव पड़ा और वे ग्रहण को किस तरह से लेते हैं। इसका अध्ययन करने विज्ञान संचारिका सारिका घारू ग्रामीणों के बीच पहुंची। उन्होंने सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया सहित इलेक्ट्रानिक मीडिया पर प्रसारित खबरों का आदिवासी इलाकों में प्रभाव अंधविश्वास से इतर सामान्य पाया। कमोवेश पढ़े-लिखे सजग शहरियों में आज भी ग्रहण को लेकर पुरानी मान्यता देखने मिली। सारिका ने बताया तीन गांवाें का भ्रमण कर 700 लोगों से पूर्ण चंद्रग्रहण को लेकर चर्चा की और उनके विचार जाने। जो तथ्य सामने आए वह चौकाने वाले थे। आदिवासियों का जीवन चंद्रग्रहण में भी रोज की तरह ही रहा। ग्रामीणों में राहु-केतु को लेकर कोई डर नहीं था, न ही ग्रहण के किसी राशि पर पड़ने वाले प्रभाव का असर था। वृद्धों सहित महिलाओं की दिनचर्या ग्रहण और तथाकथित सूतक के दौरान सामान्य की तरह थी। गांव के कुछ नवयुवकों को ग्रहण की जानकारी थी। परंतु वे भी धार्मिक मान्यताओं को कट्‌टरता से न अपनाने की कोशिश में थे। इसके विपरीत साक्षर शहरी आज भी ग्रहण को लेकर पुरानी मान्यताओं का अनुसरण करते हैं, या यू कहें अंधविश्वासी हैं। सारिका ने बताया ग्रामीणों का मानना था। यह एक खगोलीय घटना है। चांद कर रंग परिवर्तित होता देख रोमांच का अनुभव होना चाहिए, न अंधविश्वास। रोज की तरह ही आदिवासी अपने काम काज कर शाम को अपनी ही शैली में रमे रहे। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे उन्हें ग्रहण से कोई इत्फाक अंधविश्वास काे लेकर नहीं है। यह इसलिए और महत्तवपूर्ण है बुजुर्ग अादिवासी महिलाओं में ग्रहण को लेकर रूढ़िवाधिता नजर नहीं आई।

शोध-अध्ययन

सुपरमून से रेड ब्लूमून तक के पूर्ण चंद्रग्रहण को लेकर ग्रामीण अंचल में रहने वाले आदिवासियों पर किया शोध

सोहागपुर। ग्रामीणों से चर्चा करते विज्ञान संचारिका सारिका घारू।

खगोलीय घटनाओं पर लोगों का नजरिया

विज्ञान संचारिका सारिका विज्ञान के क्षेत्र में इनोवेशन और तमाम खगोलीय घटनाओं को वैज्ञानिक तौर पर लोगों के बीच लाना चाहती हैं। ग्रामींण रूढ़िवादिता के जरिए पहले से वैज्ञानिक हैं। केवल उन्हें विज्ञान के नजरिए से समझाना होता है। ऐसा करने से ग्रामीणों की पुरानी मान्यता या अंधविश्वास विज्ञान के तरीकों में बदल जाता है। लेकिन ग्रहण को लेकर चौकाने वाले परिणाम देखने को मिले। जब उन्होंने कहा ग्रहण से क्या होता है।

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