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कम दान मिलने से गायों को नहीं मिल पा रहा पर्याप्त चारा, भूख से हो रही कमजोर

नगर के बांके बिहारी गोशाला में गायों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पाने से गायें भूख से कमजोर हो रही हैं। ऐसा इसलिए हो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:10 AM IST

नगर के बांके बिहारी गोशाला में गायों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पाने से गायें भूख से कमजोर हो रही हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि गोशाला समिति को गायों की देखरेख व इनके आहार की व्यवस्था करने के लिए नगर से दान कम मिल रहा है। गोशाला में 40 गोवंश हैं। इनमें से कईं भूख व बीमारी से कमजोर हो गए हैं। इनके स्वास्थ्य की जांच करने यहां पशु डॉक्टर भी नहीं पहुंच रहे हैं।

गायों को गेहूं का सूखा चारा खाकर ही गुजारा करना पड़ रहा है। समिति सदस्यों ने बताया सरकार से मिलने वाला बजट नाकाफी है। साथ ही नगर से भी दान कम मिल रहा है। यदि नगरवासी पर्याप्त मात्रा में गोशाला को दान दें तो गायों को हरा चारा व पर्याप्त मात्रा में आहार उपलब्ध कराया जा सकता है। अभी जो दान मिल रहा है। वह 40 गायों के लिए नाकाफी हैं। गायों के लिए पर्याप्त संसाधन व सफाई व्यवस्था नहीं होने से गायें बीमार पड़ रही हैं। उनके इलाज के लिए यहां पशु विभाग से कोई डॉक्टर नहीं पहुंच रहे हैं। रविवार सुबह एक गाय बीमार हुई जो शाम 4 बजे तक एक ही जगह अचेत होकर पड़ी रही। लेकिन इसे इलाज नहीं मिल सका। हालांकि कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि गोशाला का संचालन गैर जिम्मेदार से किया जा रहा है। यहां कर्मचारियों को रखा गया है। लेकिन वे गायों की देखरेख नहीं कर रहे हैं। बल्कि अपने निजी खेतों का कार्य करते हैं। जबकि वेतन गोशाला से ले रहे हैं। नगर के बालू शर्मा ने बताया गोशाला में डॉक्टरों के माध्यम से कभी विजिट नहीं की जाती है। बीमार गायों का इलाज सही समय पर नहीं हो पा रहा है। जबकि शासन के निर्देश अनुसार गोशाला में पशु चिकित्सकों द्वारा विजिट की जानी चाहिए।

पुलिस जब्त गायों को छोड़ देती है, नहीं देते खर्च

बांके बिहारी गोशाला में भूख से कमजोर दिखती गायें।

गोशाला ने लगाई 35 दानपेटियां

विक्की चौहान ने बताया गोशाला समिति के माध्यम से नगर सहित आसपास के गांवों में चंदा एकत्र करने के लिए 35 दानपेटी लगाई गई हैं। इनपर बांके बिहारी गोशाला लिखा है। इन सभी में प्रतिमाह करीब 500 रुपए जमा हो रहे हैं। यदि लोग इन दानपेटी में अधिक दान डालें तो गायों के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा पानी की व्यवस्था की जा सकती है। गोशाला समिति गायों को व्यवस्था देने के संबंध में कोईं नहीं पहल नहीं कर रही है। यही इनके माध्यम से प्रयास किए जाएं तो लोगों को आसानी से इससे जोड़ा जा सकता है।

संचालक मंडल की होगी बैठक

गोशाला के संचालन में किसी तरह की लापरवाही नहीं की जा रही है। शासन की ओर से सहायता नाकाफी होती है। साथ ही दान भी कम आ रहा है। संचालक मंडल की बैठक होना बाकी है। इसमें नए पदाधिकारियों को कार्यभार सौंपा जाएगा। लोगों को सहयोग से और बेहतर व्यवस्था करने की कोशिश करेंगे। -शालकराम गुप्ता, कोषाध्यक्ष, बांके बिहारी गोशाला ठीकरी।

गोशाला की भूमि पर हो रहा अतिक्रमण

गोशाला के कोषाध्यक्ष शालिकराम गुप्ता ने बताया गोशाला की भूमि पर आपराधिक तत्वों ने अतिक्रमण कर लिया है। इस संबंध में कई बार जनसुनवाई के माध्यम से तहसीलदार व कलेक्टोरेट में शिकायत की गई है। लेकिन अभी तक अधिकारियों ने गोशाला भूमि का सीमांकन नहीं कराया है। इससे गायों के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। यदि गोशाला की भूमि का सीमांकन कर अतिक्रमण मुक्त किया जाए तो इस भूमि पर चारा उगाकर गायों को हरा चारा उपलब्ध कराया जा सकता है।

आसपास के थानों में पुलिस कार्रवाई में जब्त गायों को गोशाला में छोड़ दिया जाता है। जबकि इनके चारा पानी की व्यवस्था करने के लिए खर्च नहीं दिया जाता है। साथ ही जो लोग गोशाला में गाय छोड़कर जाते हैं वे न तो दुधारू होती हैं। न ही स्‍वास्‍थ्‍य हैं। इनकी देखरेख पर गोशाला का अतिरिक्त खर्च होता है।

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