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फैक्ट्री से निकाले 300 मजदूर 132 दिन से दे रहे धरना, मांग- काम पर वापस लो

ठीकरी के पास निमरानी स्थित सेंचुरी यार्न डेनिम कंपनी के मालिक ने चार माह पहले कंपनी बिरला ग्रुप को बेच दी थी। इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:35 AM IST

फैक्ट्री से निकाले 300 मजदूर 132 दिन से दे रहे धरना, मांग- काम पर वापस लो
ठीकरी के पास निमरानी स्थित सेंचुरी यार्न डेनिम कंपनी के मालिक ने चार माह पहले कंपनी बिरला ग्रुप को बेच दी थी। इस दौरान नए मालिक ने कंपनी में 20साल से काम कर रहे 300 मजदूरों को निकाल दिया था। इसके बाद मजदूरों ने काम पर वापस लेने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया था। जो 132दिन बाद भी चल रहा है। कंपनी से निकाले गए मजदूर रोजी-रोटी के लिए भटक रहे हैं। कंपनी में करीब 1200 मजदूर कार्यरत हैं। इसमें से ठीकरी के करीब 400 मजदूर हैं। मजदूरों के विरोध के बाद से कंपनी बंद है। नगर के मजदूर कंपनी के बाहर धरना दे रहे हैं। साथ ही इनके सामने रोजी-रोटी का संकट है। कंपनी में मशीन ऑपरेटर सहित अन्य पदों पर कार्यरत मजदूर अब नगर में हाथ ठेला चलाकर व अन्य तहत से परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हो रहे हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही तीन परिवारों की कहानी।

इन्हें भी करनी पड़ रही दिहाड़ी मजदूरी

इसी तरह समाधान पाटिल भी सेंचुरी कंपनी में सिनजिंग आपरेटर के पद पर हैं। इनके 2 बच्चे है। यह ठीकरी में हम्माली करके अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं। अशोक नेहेते जोकि कंपनी में टेकलर के पद पर हैं। इन्हें 15रुपए मिलते थे। जबकि दिहाड़ी मजदूरी कर रहे हैं। इससे उन्हें 230 रुपए की कमाई हो पाती है। परिवार में 2 बच्चे। इससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।

हमारी लड़ाई हक की है। हम इसे लेकर रहेंगे। 20साल से कंपनी को सेवा दे रहे हैं। कंपनी हमें इस तरह से नहीं निकाल सकती। राजकुमार दुबे, यूनियन लीडर, ठीकरी।

कंपनी में इलेक्ट्रिशियन पद पर कार्यरत, अब लगा रहे ज्यूस का ठेला

योगेश भंगाले कंपनी में इलेक्ट्रिशियन पद पर कार्यरत हैं लेकिन इन्हें अब अपनी रोजी रोटी के लिए नगर में गन्नेे का ठेला लगना पड़ रहा है। भंगाले ने बताया परिवार में प|ी सहित एक बेटी है। परिवार का खर्च चलाने के लिए यह काम करना पड़ रहा है। इसमें 200 रुपए प्रतिदिन की कमाई हो पा रही है। जबकि कंपनी में 13500 रुपए मिलते थे।

रंगाई पुताई का काम करते पितांबरा पाटिल

नगर के पितांबर पाटिल सेंचुरी में यार्न में आपरेटर के पद पर हैं। लेकिन अब इन्हें नगर में रंगाई पुताई का काम करके अपने परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। पाटिल ने बताया कंपनी में 14हजार रुपए मिलते थे। जबकि रंगाई पुताई का काम करते 250रुपए ही कमा पाते हैं। काम भी रोज नहीं मिलता है।

लूम मशीन आपरेटर हैं, पापड़ बनाकर कर रहीं गुजारा

दीपाली फेगड़े पति प्रमोद फेगड़े कंपनी में लूम मशीन आपरेटर हैं। लेकिन इन्हें अब पापड़ बनाकर परिवार चलाना पड़ रहा है। जबकि कंपनी में इन्हें 10हजार रुपए महीने मिलते थे। अब महीने के 6हजार रुपए ही कमा पा रही है। इससे आर्थिक हालात ठीक नहीं हैं। एक लड़का है। इसकी पढ़ाई में भी खर्च हो रहा है।

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