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टिमरनी जनपद अध्यक्ष निधि के खिलाफ एसडीएम को दिया अविश्वास प्रस्ताव पत्र

भाजपा में कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी कलह और आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी में किसी एक का शीर्ष का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:40 AM IST

भाजपा में कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी कलह और आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी में किसी एक का शीर्ष का नेतृत्व सर्वमान्य नहीं होने से पार्टी के लोग ही खुलकर जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बगावत करने लगे हैं। बुधवार को टिमरनी जनपद पंचायत अध्यक्ष निधि बद्रीनारायण राजपूत के खिलाफ 25 में से 18 सदस्यों के हस्ताक्षर से अविश्वास प्रस्ताव एसडीएम जेपी सैयाम को सौंपा है।

टिमरनी जनपद में 25 जनपद सदस्यों में से 22 भाजपा व 3 कांग्रेस से जुड़े हैं। इनमें से 18 सदस्यों के हस्ताक्षर का संयुक्त अविश्वास प्रस्ताव पत्र बुधवार को 14 सदस्यों ने एसडीएम को सौंपा। इसमें जपं अध्यक्ष निधि राजपूत को पद से हटाने की मांग की। एसडीएम को दिए अविश्वास प्रस्ताव में सदस्यों ने कहा अध्यक्ष निधि राजपूत के क्रियाकलापों व गतिविधियों तथा कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। इस कारण अब उन पर उन्हें विश्वास नहीं रहा। सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव की सूचना पर विधि अनुसार सम्मेलन का स्थान व तारीख तय कर निराकरण की मांग की। जिससे उनके अधिकारों का हनन न हो।

अविश्वास प्रस्ताव पर इनके हैं हस्ताक्षर

अविश्वास प्रस्ताव पत्र पर 18 सदस्यों के दस्तखत हैं। इनमें सुमन गणेश पटेल, पूजा कमलेश शर्मा, अंतरसिंह सोलंकी, नर्मदाप्रसाद चौरे, सावित्री भवानी सिंह, सोनू सुंदरलाल, माया रविशंकर गौर, गंगाबाई लखनलाल, रामकिशन धुर्वे, शांतिबाई, ज्योति बारंगे, रामकृष्ण मांगुल्ले, प्रताप सिंह, सजंती, ललिता उइके, सुनीता मालवीया, लक्ष्मण कलम शामिल हैं।

टिमरनी के जनपद सदस्यों ने आवेदन दिया है। कलेक्टर को इससे अवगत कराया जाएगा। वे ही आगे विधि अनुसार निर्णय लेकर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। जेपी सैयाम, एसडीएम हरदा

हरदा। एसडीएम को अविश्वास प्रस्ताव देते जपं सदस्य।

विधायक शाह की बढ़ी मुश्किलें

3 साल बाद जनपद अध्यक्ष के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव ने विधायक संजय शाह की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जपं में 18 सदस्य भाजपा से ही जुड़े हैं। ऐसे में उनके द्वारा ही विस चुनाव से 8 माह पहले इस तरह खुलकर असंतोष जाहिर कर अध्यक्ष को हटाने की मांग ने शाह के स्थानीय नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जपं अध्यक्ष राजपूत शाह के खेमे से ही मानी जाती हैं। वहीं उनके पति बद्रीनारायण राजपूत विधायक प्रतिनिधि हैं। पूर्व में उनके द्वारा जपं की बैठकों में बेवजह हस्तक्षेप के कई बार आरोप लग चुके हैं। पार्टी व संगठन स्तर तक मामला पहुंचा चुका है। लेकिन शाह सभी को बैठाकर आपस में मामला सुलझा नहीं सके। नाराज सदस्यों ने दो टूक कहा वे अब अध्यक्ष की मनमानी सहन नहीं करेंगे। वे राजपूत को हटाने की मांग पर अडिग हैं।

थम नहीं रही कलह

भाजपा में आंतरिक कलह की शुरुआत बीते साल भाजयुमो जिलाध्यक्ष सुरेश लाठी की नियुक्ति के साथ शुरू हुई। कई दिन विरोध चला। फरवरी में भाजपा के 12 पार्षदों ने नपा में स्वच्छता अभियान के तहत बनवाए बैनर, पहल एनजीओ को दिए काम व डस्टबिन की खरीदी तथा प्लास्टिक बेचने की जानकारी मांगी। अध्यक्ष को स्पष्टीकरण देना पड़ा। बैठक में महामंत्री सिद्धार्थ पचौरी की मौजूदगी को लेकर पार्षद ओपी मोरछले के इशारे से मामला मचा। जिलाध्यक्ष ने नोटिस जारी किया। इस बीच हरदा जनपद में भाजपा से जुड़ी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ गया।

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