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जल स्तर गिरने से 50 हैंडपंप बंद, डिमांड 100 से बढ़कर 130 टैंकरों पर पहुंची

हरदा। टैंकर आते ही लगती है इस तरह भीड़। हरदा। पानी के इंतजार में खड़ी महिलाएं।

Dainik Bhaskar

Apr 04, 2018, 05:55 AM IST
जल स्तर गिरने से 50 हैंडपंप बंद, डिमांड 100 से बढ़कर 130 टैंकरों पर पहुंची
हरदा। टैंकर आते ही लगती है इस तरह भीड़।

हरदा। पानी के इंतजार में खड़ी महिलाएं।


नलों में लग रहीं मोटरें, नहीं हो रही कार्रवाई

पानी की पूर्ति के लिए ज्यादातर लोग नलों की टोटियों में मोटरें लगाकर ज्यादा पानी खींच रहे हैं। ऐसे में एक ही पाइप लाइन से नल कनेक्शन लेने वाले आखिरी छोर के व्यक्ति के मकान तक प्रेशर से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। सार्वजनिक नलों से भी पानी बेकार बह रहा है। लोग घरों के सामने तराई कर रहे हैं। आपसी बुराई होने से बचने के कारण लोग नपा को शिकायत नहीं कर रहे हैं। इससे पानी बर्बाद हो रहा है। सुभाष वार्ड की विमला यादव, सत्तार कॉलोनी की क्षमाबाई ने कहा नल से सप्लाई के समय बिजली बंद रहे तो सभी को पानी मिल सकता है।

5 नए वार्डों में पुरानी नलजल व्यवस्था

शहर का दायरा बढ़ने के बाद नपा में 5 नए वार्ड और जुड़े हैं। इनमें अभी पंचायतों के समय से चली आ रही पुरानी नल जल योजना से ही सप्लाई चल रही है। इसका संचालन और देखभाल नपा कर रही है। इन वार्डो में गर्मी शुरू होते ही समस्या आने लगी थी। वार्डों में 3-3 हजार लीटर क्षमता की टंकियां रखवाई हैं। जिन्हें रोज टैंकरों से भरा जा रहा है। इसमें लगे नलों से लोग पानी भर रहे हैं।

दूसरे पखवाड़े में बढ़ेगा जल संकट

नर्मदा में पानी कम हो रहा है। इंटकवेल तक पोकलेन व जेसीबी से खुदाई कर दो बार पानी लाने नाली बनाई जा चुकी है। फिलहाल यहां से 90 लाख लीटर पानी मिल रहा है। बिरजाखेड़ी में लगातार निगरानी के कारण अभी 20 लाख लीटर पानी मिल रहा है। ट्यूवबेल व अन्य स्रोतों से एक लाख लीटर पानी मिल रहा है। लेकिन अजनाल से मूंग में पानी देने पर रोक नहीं लगी तो अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में आपूर्ति में कमी आना तय है। इधर जिले में जल की उपलब्धता व मांग आपूर्ति तथा स्रोतों के वर्तमान हालात की समीक्षा के लिए सोमवार को रखी गई बैठक प्रभारी मंत्री लालसिंह आर्य के नहीं आने से नहीं हो सकी।

यह कर रहे स्थायी समाधान

नपा इन नए वार्डों में पानी की स्थायी व्यवस्था के लिए संपवेल व टंकियां बनाने का प्रस्ताव नपा पास कर चुकी है। इनमें 6-6 लाख लीटर क्षमता की सीमेंट कांक्रीट की टंकियां बनेंगी। 4-4 लाख लीटर क्षमता वाले संपवेल बनेंगे। जिससे पाइप लाइन में खराबी आने या बिजली की समस्या होने पर भी नागरिकों को टंकी व संपवेल से पानी दिया जा सके।

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