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ओशो की पैतृक भूमि देखने विदेशों से आए शिष्य

आचार्य रजनीश (ओशो) के पैतृक गांव और जन्मभूमि को देखने के लिए सोमवार को विदेशी शिष्य आए। ये शिष्य फ्रांस, हॉलैंड,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 06, 2018, 06:15 AM IST

आचार्य रजनीश (ओशो) के पैतृक गांव और जन्मभूमि को देखने के लिए सोमवार को विदेशी शिष्य आए। ये शिष्य फ्रांस, हॉलैंड, नीदरलैंड और जापान से आए हैं। जहां उन्होंने गुरु ओशो के बारे में और जानकारी हासिल की।

नगर के गांधी चौक के पास स्थित ओशो के पैतृक गांव और जन्मभूमि देखने आए शिष्य ने आचार्य रजनीश के बारे में जानकारी हासिल की। उनके चित्र का पूजन कर 10 मिनट का मौन धारण कर उनका नाम लिया। फ्रांस, जापान, हॉलैंड, नीदरलैंड, जापान से आए शिष्यों ने सदगुरु ओशो के जीवन पर चर्चा करते हुए स्वामी आनंद अनंत ने कहा उनके जन्मस्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ओशो जन्मभूमि अगर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होती है तो यहां हर साल दुनियाभर से विदेशी आएंगे और ओशो के बारे में जानकारी हासिल करेंगे, क्योंकि ओशो का पैतृक गांव टिमरनी है। जिससे शहर का नाम विदेशों में भी लिया जाएगा। पूर्व में ओशो की जन्मभूमि व पैतृक गांव टिमरनी में कई बार विदेशी आ चुके हैं।

ओशो राज कल्याण समिति हरदा के तत्वाधान में आयोजित रूहानी भजन संध्या में भाग लेने के लिए हरदा पहुंचे, जहां शाम को भजन संध्या के दौरान ओशो पर विशेष चर्चा की और ब्रह्म रस के रूहानी गीतों का स्थानीय व विदेशी शिष्यों ने आनंद लिया।

ओशो के पैतृक गांव पहुंचे विदेशी।

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