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भाषा अभिव्यक्ति को सशक्त बनाती है: डॉ जोशी

भाषा एक भावनात्मक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारे सामाजिक जीवन से जुड़ी हुई है। यह भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति में...

Danik Bhaskar | Feb 22, 2018, 06:20 AM IST
भाषा एक भावनात्मक मुद्दा है, क्योंकि यह हमारे सामाजिक जीवन से जुड़ी हुई है। यह भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति में सशक्त बनाती है। यह सामूहिक पहचान और बंधुता के साथ एकता को बढ़ाती है। हम अपने विचारों को अपनी मातृभाषा में कहीं बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। यदि बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाए तो उसके कहीं बेहतर नतीजे हासिल होते हैं। यह बात एक निजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनपी जोशी ने बुधवार को कही। वे अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। भाषण प्रतियोगिता हुई। प्रतियोगिता में भूषण शोले प्रथम और दीपिका गौर द्वितीय रहीं। सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी डॉ. सरोज शर्मा ने बताया अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस मनाने का उद्देश्य भाषाओं और भाषाई विविधता को बढ़ावा देना है। एके मिश्रा ने कहा भाषा, संस्कृति की जीवन रेखा होती है। हम बहुभाषी दुनिया में रह रहे हैं। हमें दुनिया की इस बहुभाषी संस्कृति की सहेजने की दरकार है। इसके लिए जरूरी है प्रत्येक भाषा को संरक्षित करने के साथ ही उसे समुचित रूप से उन्नत बनाया जाए।

आयोजन

अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर विद्यार्थियों को किया जागरूक

टिमरनी। युवाओं को जागरूक करते हुए।

संविधान और युवा की भूमिका पर किया जागरूक

टिमरनी|
संविधान की जागरूकता और सांविधानिक संरचना को बनाए रखने में युवाओं की भूमिका पर कार्यशाला हुई। इसमें हितेश गोहिया ने जागरूक समाज का निर्माण करने और युवाओं को सामाजिक समावेशन के परिचित कराने के लिए युवाओं को संविधान का उद्देश्य, मौलिक अधिकार, कर्तव्यों के बारे में बताया। कार्यशाला में सिनर्जी संस्थान के विष्णु जयसवाल ने युवाओं को संविधान के तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया।