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ट्विटर पर गुस्सा, बोले- संिवदाकर्मियों को दबाओगे तो सरकार कैसे बनाओगे

Dainik Bhaskar

Feb 22, 2018, 06:20 AM IST

Timarni News - संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला अस्पताल परिसर में हनुमान मंदिर के सामने एकत्रित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र...

ट्विटर पर गुस्सा, बोले- संिवदाकर्मियों को दबाओगे तो सरकार कैसे बनाओगे
संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला अस्पताल परिसर में हनुमान मंदिर के सामने एकत्रित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को ट्वीट किया। इसमें जुमलों, तुकबंदी, स्लाेगन के जरिए सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए बीते चुनाव में भाजपा को वोट देने के निर्णय को सबसे बड़ी भूल बताया।

गुरुवार को सांसद विधायकों की घेराबंदी कर उनसे यह पूछा जाएगा उन्होंने संविदा कर्मियों के लिए क्या किया। इधर हड़ताल से अस्पताल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार स्थिति बिगड़ रही है।

सरकार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान संविदा कर्मियों ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए अपने मोबाइल से पीएम, सीएम और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को ट्वीट किया।

एड्स, टीबी जांच केंद्र का 3 दिन से ताला बंद।

हरदा। पीएम, सीएम को ट्वीट करते संविदा कर्मी।

यह लिखा ट्वीट में

हड़ताली संविदा कर्मियों ने ट्विटर पर लिखा हमारी भूल कमल का फूल, संविदा विरोधी बीजेपी, संविदा को दबाओगे तो सरकार कैसे बनाओगे, शोषण करता है क्या बीजेपी का पोषण, जुबां पे दर्द दिल में शूल, हमारी भूल कमल का फूल जैसे सरकार विरोधी नारे लिखे। तीखी प्रतिक्रियाएं लिखकर विरोध जताया। फेसबुक पर भी संविदा कर्मियों ने जमकर भड़ास निकाली और सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए लिखा वे उनसे 15 साल से नियमित कर्मचारियों की तरह काम करा रहे हैं, लेकिन कोई सुविधा व लाभ नहीं दे रहे हैं।

एनआरसी को लेकर कलेक्टर थे

सख्त, अब विकल्प तक नहीं

ग्रामीण अंचलों के भ्रमण के दौरान कलेक्टर अनय द्विवेदी ने कुपोषित, अति कुपोषित व कम वजन वाले बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने के बीएमओ व महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले को सख्त निर्देश दे रखे हैं। वे रोज इसकी मानीटरिंग भी करते हैं। क्षमता से कम बच्चे भर्ती कराने व पूर्व में डॉक्टर व अन्य मैदानी अमले को शोकॉज जारी कर काम नहीं वेतन नहीं के आधार पर वेतन भी काट चुके हैं। लेकिन हड़ताल के दौरान जिले के चारों एनआरसी के ताले नहीं खुल पा रहे हैं। इससे निपटने प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक प्लान नहीं है। हड़ताल शुरू होते ही हरदा एनआरसी में भर्ती बच्चों की चुपचाप छुट्टी कर दी। जिले में 50 फीसदी स्वास्थ्य अमला संविदा का है, जो विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों और योजनाओं को संचालित करता है। हरदा, खिरकिया, टिमरनी व रहटगांव के एनआरसी, टीबी, एड्स कंट्रोल, अंधत्व, टीकाकरण, आईडीएसपी, मलेरिया और सीएमएचओ को लिपिकीय स्टाफ संविदा पर है। इन दफ्तरों के ताले भी नहीं खुल पा रहे हैं। जिला अस्पताल एसएनसीयू में सिर्फ दो नर्सें पूरी व्यवस्था संभाल रही हैं। यहां संविदा का 20 का स्टाफ रोज अपनी सेवाएं देता था। हालत यह है ड्रेसर, कंपाउंडर दवा बांट रहे हैं। ओपीडी में आने वाले मरीज अब निजी डॉक्टरों को फीस देकर उपचार करा रहे हैं।

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