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एनओसी में अटकी 7 ग्राम पंचायतों की खदानें, दोगुना तक महंगी मिल रही रेत

एनओसी के फेर में सात ग्राम पंचायतें अब तक रेत खदानें शुरू नहीं कर पाई हैं। इसके चलते लोगों को दो गुना दाम पर रेत मिल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 14, 2018, 06:45 AM IST

एनओसी में अटकी 7 ग्राम पंचायतों की खदानें, दोगुना तक महंगी मिल रही रेत
एनओसी के फेर में सात ग्राम पंचायतें अब तक रेत खदानें शुरू नहीं कर पाई हैं। इसके चलते लोगों को दो गुना दाम पर रेत मिल रही है। विभाग का दावा है आवंटन की कार्रवाई विभाग ने शुरू कर दी है। एक सप्ताह में एनओसी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद सात ग्राम पंचायतें 96 हेक्टेयर क्षेत्र में तीन मीटर गहराई तक रेत का खनन कराकर बेच सकेंगी। वर्तमान में खनिज निगम की खदानों से लोगों को महंगे दामों पर रेत मिल रही है। पंचायतों से रेत खनन शुरू होने के बाद रेत के दाम कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में रेत दो गुना तक महंगी मिल रही है।

रेत माफिया अपना मुनाफा कमाने के फेर में 2500-3000 रुपए में प्रति ट्राॅली के हिसाब से रेत बेच रहे हैं। ग्राम पंचायतों से लोगों को 1500 रुपए ट्राॅली रेत मिलेगी। महंगी रेत मिलने से मकान निर्माण महंगा हो रहा है। चोरी रोकने के लिए ऑन लाइन बुकिंग से लेकर ट्रैक्टर-ट्राॅली से रेत ढोने, डंपरों में जीपीएस और ऑन लाइन नंबर सहित मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी, लेकिन विभाग के पास कोई ट्रेंड अधिकारी नहीं है। इससे चोरी और अवैध उत्खनन पर लगाम लगाना खासा चुनौती भरा मामला होगा। वर्तमान में नर्मदा में छह स्थानों से रेत खनन हो रहा है। इसमें लछोरा, उचान, हंडिया, मनोहरपुरा, गोला (ब) व गोला-मैदा शामिल हैं।

नाव से होता है अवैध उत्खनन, ट्राॅली से ढो रहा माफिया

हरदा और देवास में नर्मदा जिले की 9 ग्राम पंचायतों के किनारे से गुजरती है। लेकिन इन पंचायतों के गांवों में दिन और रात के अंधेरे में रोजाना दर्जनों स्थानों पर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन होता है। इसमें रेत माफिया मजदूरों से नाव के माध्यम बीच नर्मदा से रेत उत्खनन कराते हैं। रेत नर्मदा के किनारे एकत्रित होती है। यहां से रेत का अवैध परिवहन होता है। खनिज विभाग और प्रशासन के अधिकारी अवैध रेत उत्खनन पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है। गोयत, खेड़ीनीमा, सिगोन, छिदगांवमेल, साल्याखेड़ी, छीपानेर सहित अन्य जगहों पर रेत माफिया वर्तमान में सक्रिय है। दबाव आने पर प्रशासन दिखावे की कार्रवाई करता है।

इसी माह के अंत तक सात ग्राम पंचायतों में रेत खदान संचालित होना है। इसकी कार्रवाई चल रही है। ग्राम पंचायतों को खदानें आवंटित कर दी जाएंगी। शासन से अनुमति मिलते ही ग्राम पंचायतें रेत बेच सकेंगी। अर्चना ताम्रकार, खनिज अधिकारी, हरदा

इन ग्राम पंचायतों में शुरू होगी नई रेत खदानें

हंडिया के खेड़ीनीमा (अ) में 13 हेक्टेयर, खेड़ीनीमा (ब)में 14 हेक्टेयर, सिगोन में 21 हेक्टेयर, टिमरनी के लछोरा में 15 हेक्टेयर, छिदगांव मेल में 7.810 हेक्टेयर, बघवाड़ में 16 हेक्टेयर और साल्याखेड़ी में 10 हेक्टेयर में रेत खदान चिन्हित होंगी। निगम इन्हीं ग्राम पंचायतों को खदान का संचालन सौंपने की तैयारी कर रहा है।

जीपीएस से होगी मॉनिटरिंग

रेत परिवहन वाले डंपर में जीपीएस सिस्टम लगाना होगा। इसके लिए सरकार एजेंसी निर्धारित करेगी। इसके टेंडर जारी होंगे। जीपीएस लगाने के पीछे अफसरों का तर्क है रेत चोरी रोकने में मदद मिलेगी। यह भी पता चल सकेगा कौन सा डंपर कितने चक्कर लगा रहा है।

खनिज निगम को 25 व पंचायत को मिलेंगे Rs. 50

नई रेत नीति में राॅयल्टी 125 रुपए प्रति घन मीटर प्रस्तावित है। इसमें से खनिज निगम को 25 रुपए प्रति घन मीटर के हिसाब से राशि मिलेगी। जबकि 50-50 रुपए ग्राम पंचायत एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान के खाते में जाएगी। जिला खनिज प्रतिष्ठान की जिम्मेदारी होगी वह इस राशि को नदियों के संरक्षण व रेत परिवहन से खराब होने वाली सड़कों की मरम्मत में खर्च करे।

इसलिए चालू नहीं हो पा रही खदानें

ग्राम पंचायतों को रेत खदान चालू करने के लिए जिला पर्यावरण समिति, राज्य पर्यावरण आंकलन समिति व केंद्र की खदान जलवायु प्रदूषण समिति का अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। अधिकांश खदानों को एनओसी देने के लिए जिला व राज्य स्तर पर अनुमति देने के प्रक्रिया चल रही है। कुछ खदानों को केंद्र की अनुमति मिलने में परेशानी हो रही है। इसलिए यह खदानें चालू नहीं हो पा रही हैं।

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