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धर्म....लक्ष्मण को लगी शक्ति, कुंभकर्ण का किया वध

करताना| कुहीग्वाड़ी में चल रही रामलीला में शुक्रवार को लक्ष्मण शक्ति, मेघनाद और कुंभकर्ण वध का मंचन किया गया।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 17, 2018, 07:20 AM IST

करताना| कुहीग्वाड़ी में चल रही रामलीला में शुक्रवार को लक्ष्मण शक्ति, मेघनाद और कुंभकर्ण वध का मंचन किया गया। रामलीला में श्रीराम और रावण की सेना के बीच भयंकर युद्ध हुआ। मेघनाथ ने लक्ष्मण को मारने के लिए शक्ति का प्रयोग किया। इससे वे मूर्छित हो गए। इसके बाद सुषेन वैद्य के कहने पर हनुमान हिमालय से संजीवनी बूटी लेने गए, जहां पूरा पर्वत ही उठा लाए। संजीवनी पीने के बाद लक्ष्मण व मेघनाद के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इसमें लक्ष्मण ने मेघनाद का वध किया। फिर रावण ने अपने छोटे भाई कुंभकर्ण को जगाया। भगवान श्रीराम ने कुंभकर्ण का वध किया। गांव में चल रही सात दिनी रामलीला को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं।

धर्म....मेला भ्रमण पर निकले भगवान गुप्तेश्वर

धर्म....मेला भ्रमण पर निकले भगवान गुप्तेश्वर

चारुवा| महाशिवरात्रि के तीसरे दिन भगवान गुप्तेश्वर मेला भ्रमण के लिए निकले। बैंडबाजे के साथ उनकी पालकी निकली। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन किए। मेले के मुख्य मार्ग से होती हुई भगवान की पालकी बाणगंगा नदी के तट पर पहुंची, जहां आकर्षक आतिशबाजी का प्रदर्शन हुआ। नदी पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद मेले का भ्रमण करती हुई पालकी वापस मंदिर पहुंची, जहां भक्तों के कंधों पर सवार देवादिदेव गुप्तेश्वर महादेव ने मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल, जिलाध्यक्ष अमरसिंह मीणा समेत अन्य ने दर्शन किए।

चारुवा| महाशिवरात्रि के तीसरे दिन भगवान गुप्तेश्वर मेला भ्रमण के लिए निकले। बैंडबाजे के साथ उनकी पालकी निकली। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन किए। मेले के मुख्य मार्ग से होती हुई भगवान की पालकी बाणगंगा नदी के तट पर पहुंची, जहां आकर्षक आतिशबाजी का प्रदर्शन हुआ। नदी पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद मेले का भ्रमण करती हुई पालकी वापस मंदिर पहुंची, जहां भक्तों के कंधों पर सवार देवादिदेव गुप्तेश्वर महादेव ने मंदिर की परिक्रमा की। इस दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल, जिलाध्यक्ष अमरसिंह मीणा समेत अन्य ने दर्शन किए।

धर्म....18 मार्च से शुरू होगा पंच कुंडात्मक शतचंडी यज्ञ

टिमरनी| वार्ड 8 में शिवधाम मंदिर परिसर में 18 से 25 मार्च तक पंच कुंडात्मक शतचंडी महायज्ञ होगा। इसमें काशी के विद्वान यज्ञ करेंगे। ध्वजा पूजन 20 फरवरी को होगा। 18 मार्च को शोभायात्रा निकालने के बाद महायज्ञ शुरू होगा। पूर्णाहुति 25 मार्च को होगी।

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