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सहकारी बैंक किसानों को दे रही चिल्लर बिजली कंपनी बिल जमा करने नहीं ले रही

बैंक शाखाओं में रुपए निकालने पहुंच रहे किसानों को बैंक प्रबंधन नोट के साथ चिल्लर भी थमा रहा है। इसमें जिला सहकारी...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 10, 2018, 04:25 AM IST

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    बैंक शाखाओं में रुपए निकालने पहुंच रहे किसानों को बैंक प्रबंधन नोट के साथ चिल्लर भी थमा रहा है। इसमें जिला सहकारी बैंक शाखा को 5 लाख की चिल्लर दी गई है। इस चिल्लर को खपाने के लिए प्रबंधन किसानों पर दबाव बना रहे हैं। उनसे विड्राॅल पर्ची भरवाकर 500-500 की चिल्लर थमाई जा रही है। इसमें 5 व 10 रुपए के सिक्के दिए जा रहे हैं। इससे किसान आक्रोशित हैं। उन्हें चिल्लर खपाने में काफी मशक्कत करना पड़ रही है। भवरास के किसान माखन सिंह ने बताया जिला सहकारी बैंक चिल्लर थमाने के लिए प्रबंधन ने बाकायदा 500 रुपए की विड्राॅल पर्ची भरवा रही है। जिससे नोटों के साथ प्रत्येक किसान को 500 रुपए की चिल्लर थमाई जा सके। बैंक प्रबंधन 500-500 रुपए की चिल्लर की थैलियां बना रखी हैं। वहीं अन्य बैंकों में भी किसानों को राशि का भुगतान करते समय चिल्लर की थैलियां थमाई जा रही हैं। प्रबंधन ने चिल्लर की थैली देना अनिवार्य कर दिया है।

    बिजली कंपनी ने नहीं ली चिल्लर

    बैंकों द्वारा दी जा रही चिल्लर किसानों के परेशानी बन रही है। जब किसान दूसरे लोगों के पास यह चिल्लर लेकर जा रहे हैं तो वे इसे जमा करने में आनाकानी कर रहे हैं। बुधवार को पोखरनी निवासी गणेश मुकाती ने जिला सहकारी बैंक से अपनी फसल की राशि निकाली तो उसे 500 की चिल्लर थमाई गई। इसे लेकर वह बिजली कंपनी के कार्यालय में 5 हजार रुपए का बिजली बिल जमा करने गया, लेकिन एटीपी मशीन संचालक मंगलसिंह लौवंशी ने चिल्लर लेने से मना कर दिया।

    टिमरनी। बिजली कंपनी कार्यालय में परेशान होता किसान। इनसेट बैंक द्वारा दी गई चिल्लर।

    राशि निकालने किसान घंटों धूप में लाइन में खड़े, यहां भी थमा रहे चिल्लर

    रहटगांव

    समर्थन मूल्य पर बेची उपज की राशि निकालने के लिए किसानों को घंटों धूप में खड़े होना पड़ रहा है। बैंक शाखा के बाहर लंबी लाइन लग रही है। इसके बाद उन्हें चिल्लर थमाई जा रही है। जिला सहकारी बैंक शाखा में बुधवार को दोपहर में किसान राशि निकालने के लिए लाइन में लगे रहे। किसान रामकृष्ण गुर्जर, रामाधार राजपूत, वीरेंद्र सिंह ने बताया जैसे-तैसे तो उपज बेची, अब राशि निकालने भरी दोपहर में लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है। राशि मिली तो उसमें भी 5 व 10 रुपए के सिक्कों की थैलियां थमाई जा रही है।

    लाइन में लगे किसान पवन गौर, रामगोविंद दुबले ने बताया कि वह तीन दिनों से बैंक के चक्कर लगा रहे है। लेकिन आस भी राशि मिलेगी या नहीं कहना मुश्किल है। अब तक केसीसी का नवीनीकरण नहीं हो पाया है। इस कारण शासकीय अनुदान योजना का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। दूसरी ओर बिजली कंपनी और व्यापारी वसूली के लिए सख्ती दिखा रहे है। तीन माह बाद चना बिका लेकिन राशि अब तक नहीं मिली है। मजबूरी में रोज चक्कर लगाना पड़ रहा है।

    बैंक ही नहीं ले रही चिल्लर

    मामले में बिजली कंपनी के लौवंशी से बात की गई तो उन्होंने बताया जब कंपनी के कर्मचारी चिल्लर लेकर बैंक में राशि जमा करने जाते हैं तो बैंक प्रबंधन ही चिल्लर लेने से साफ मना कर देते हैं। ऐसे में हम आखिर कब तक चिल्लर लेकर अपनी लिए मुसीबत खड़ी करें। यदि बैंक राशि के साथ चिल्लर ले तो उन्हें उपभोक्ताओं से चिल्लर लेने में कोई परेशानी नहीं है। आखिर चिल्लर को खपाने के लिए बैंक प्रबंधन को काफी मशक्कत करना पड़ रही है।

    रहटगांव। बैंक शाखा के बाहर लगी किसानों की लंबी लाइन।

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