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गंजाल नदी में 200 किसान ले रहे फसल राजस्व विभाग लेता है Rs.200 एकड़ राशि

गंजाल नदी की तलहटी में किसान खेती-बाड़ी कर रहे हैं। इससे उन्हें आमदनी प्राप्त हो रही है। किसान नदी में सूखने के बाद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 23, 2018, 06:25 AM IST

गंजाल नदी में 200 किसान ले रहे फसल राजस्व विभाग लेता है Rs.200 एकड़ राशि
गंजाल नदी की तलहटी में किसान खेती-बाड़ी कर रहे हैं। इससे उन्हें आमदनी प्राप्त हो रही है। किसान नदी में सूखने के बाद फल एवं सब्जियां उगा रहे हैं। इससे टिमरनी और सिवनी-बानापुरा के राजस्व विभाग को 200 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से राजस्व की प्राप्ति हो रही है। इसका दोनों के बीच बंटवारा भी होता है। वहीं लोगों को अच्छी पैदावार होने से ताजे फल एवं सब्जियां मिल रही हैं।

होशंगाबाद-हरदा के बीच बहने वाली गंजाल नदी भीषण गर्मी के कारण सूख चुकी है, लेकिन इसके बाद भी वह 200 किसान परिवारों की आजीविका का साधन बनी हुई है। दो जिलों को जोड़ने वाली गंजाल नदी में किसानों द्वारा खेती-बाड़ी करने से गर्मी में अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। नदी के सूखने के बाद किसान लौकी, गिलकी, करेला, चवली फली, टिंडा, तरबूज, खरबूज और ककड़ी की खेती कर रहे हैं। राजस्व विभाग की पहल से गर्मियों में गरीब परिवारों को आमदनी का जरिया मिल रहा है।

टिमरनी। गंजाल नदी में लगी फल एवं सब्जियां।

नहीं देना पड़ता है सब्जी की बाड़ी में पानी

गंजाल नदी में लगी सब्जी की बाड़ियों में कभी भी इन परिवारों को पानी नहीं देना पड़ता हैं। नदी की तलहटी दिन में सूख जाती है, लेकिन रात के समय ठंडा होने पर अंदरूनी सतह से पानी मिल जाता है। इससे पूरी रेत गीली हो जाती है और सुबह सूरज निकलते ही धीरे-धीरे यह वापस रेत सूखने लगती है। शाम होते ही रेत गीली हो जाती है। इससे कभी सब्जियों को पानी नहीं देना पड़ता। इस कारण उन्हें अन्य संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती।

टिमरनी। स्टेट हाईवे पर लगी फल एवं सब्जियों की दुकानें।

40 हजार की आय प्राप्त होती

गंजाल नदी में खेती करने वाले लखन केवट ने बताया विभाग हमें नापकर जगह देता है। राजस्व विभाग एक एकड़ जमीन 200 रुपए में देती है। इसकी रशीद भी दी जा रही है। वे यहां वर्षों से फल-सब्जी की खेती करते आ रहे हैं। क्षेत्र में करीब 200 किसान खेती-बाड़ी कर रहे हैं, इससे विभाग को 40 हजार रुपए की आय के रूप में राजस्व की प्राप्ति हो रही है। इतना ही नहीं कुछ वर्ष पूर्व फरवरी में बाढ़ आने पर प्रशासन ने 3-3 हजार रुपए की राहत राशि प्रदान की थी।

ताजे फल-सब्जी के लिए यहां रुकते हैं लोग

नदी के दोनों ओर आधा किमी के दायरे में किसान फल एवं सब्जियों की दुकान लगाकर कारोबार कर रहे हैं। दोनों जिलों की सीमा और स्टेट हाईवे पर होने से गुजरने वाले लोग रोज फल एवं सब्जियों को देखकर खरीदी के लिए रुक जाते हैं। सभी परिवारों को वर्षों से यहां जगह दी जा रही है। उसी जगह में वह अपनी खेती लगा रहे है। इससे 200 परिवारों का गुजारा हो रहा है।

टिमरनी और बानापुरा राजस्व विभाग के पास गंजाल में खेती करने वालों की सूची होती है। राजस्व की वसूली कर दोनों के बीच बंटवारा होता है। दिनेश सिंह ठाकुर, पटवारी, छिदगांव मेल

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