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जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते बेलगाम हो रहा रेत का अवैध कारोबार

भास्कर संवाददाता | गुलाना लगभग लुट चुकी कालीसिंध नदी में थोड़े-बहुत बचे काले सोने को लूटने के लिए रेत...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 04:10 AM IST
भास्कर संवाददाता | गुलाना

लगभग लुट चुकी कालीसिंध नदी में थोड़े-बहुत बचे काले सोने को लूटने के लिए रेत कारोबारियों में होड़ मची है। नदी की संरचना की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियम कायदों को जेसीबी से ध्वस्त कर नदी के अंदर खुद के नियम लागू कर नदी का सीना छलनी करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। अवैध तरीके से नदी से निकाली जा रही रेत की कमाई लूटकर दबंग रेत माफिया शासन प्रशासन को खुलेआम ठेंगा दिखा रहे हैं।

क्षेत्र की जीवनदायिनी कालीसिंध नदी में निपानिया से कबूलपुर के बीच चुनिंदा वैधानिक तौर पर रजिस्टर्ड खदानों के अलावा चौंसला मुसलमान, दास्ताखेड़ी एवं जोरापुर के साथ दर्जनभर से भी ज्यादा अवैध खदानों को रेत के दलालों ने कमाई का जरिया बना रखा है। जानकारी के अनुसार चौंसला मुसलमान की खदान खनिज विभाग में खदान के नाम से रजिस्टर्ड ही नहीं है। फिर भी इन दिनों रेत माफिया द्वारा यहां से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि जिम्मेदारों को अवैध तरीके से नदी के अंदर से रेत निकाल रहे इन माफिया की कोई जानकारी नहीं है। सरकार के रेत अधिनियम 2017 के अनुसार रेत खदानें संबंधित क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी हैं। इसके आदेश भी जारी कर दिए गए, लेकिन रायल्टी एप नहीं मिलने के कारण अभी तक पंचायतों ने रेत खनन प्रारंभ नहीं किया। खदानों को लेकर समस्त अधिकार भी सरकार ने खनिज विभाग से छीनकर जनपद एवं जिला पंचायत को दे दिए हैं। नियमों के अदला-बदली का फायदा इन दिनों रेत माफिया खूब उठा रहे हैं। ऐसे में अब इन पर कार्रवाई कौन करेगा, यह भी तय नहीं है।नदी के अंदर कई जगह जेसीबी व पोकलेन से खोदकर मौत के घाट बना दिए हैं। पिछले वर्ष बारिश भी ज्यादा नहीं होने के कारण नदी में पुर भी नहीं आ पाई थी। नतीजतन नदी में नई रेत कम है, लेकिन रेत कारोबारी इस पर भी नहीं रुके और नदी की कराड़े खोदकर रेत निकालने का रास्ता ढूंढ निकला। दास्ताखेड़ी में कई मीटर तक की नदी की दोनों साइड की कराड़े जेसीबी से खोदकर रेत कारोबारियों ने नदी की भौगोलिक संरचना को बेतरतीब कर दिया।

चौंसला मुसलमान की अवैध रेत खदान से रेत निकालते रेत माफिया।

कार्रवाई का अधिकार अब जनपद व जिपं को