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आेवरलोड और तेज रफ्तार वाहनों से हादसे की आशंका

ओवरलोड वाहन और तेज रफ्तार के कारण नगर व क्षेत्र में हादसे का डर है। कुछ हादसों में यही कारण सामने पहले आ चुके हैं।...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 05:35 AM IST
ओवरलोड वाहन और तेज रफ्तार के कारण नगर व क्षेत्र में हादसे का डर है। कुछ हादसों में यही कारण सामने पहले आ चुके हैं। बावजूद, प्रशासन का इस ओर सख्ती बरतने पर ध्यान नहीं।

जानकारी के अनुसार क्षेत्र की सड़कों की चिकनाहट सफर करने वालों को रास नहीं आ रही है। तेज रफ्तार दौड़ती गाड़ियां मौत तक का कारण बनी है। लोगों की मानें तो इस मार्ग पर बगैर लाइसेंसी ड्राइवर की भरमार है। वाहन मालिक भी इसकी तफ्तीश में दिलचस्पी नहीं लेते। प्रशासन की इन कामों में कोई रुचि दिखती नहीं। लोग बताते हैं कि ओवरलोड वाहनों पर सवार चालक, तो बस जल्द से जल्द मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं रहती कि तेजी के चक्कर में वो अपने साथ कई जानों को जोखिम में डालते हैं। ट्रैफिक पुलिस अफसरों की मानें तो अधिकतर सड़क हादसे नशे के कारण होते हैं। बड़े वाहनों के चालक रात में नशा करके चलते हैं। इस कारण हादसा होने का खतरा बन जाता है। वहीं रफ्तार भी इसका बड़ा कारण है। क्षेत्र में ओवरलोडिंग के चलते हर साल दर्जनों हादसे हो रहे हैं। इन हादसों में कभी जान गई है, तो कइयों ने मौत से जंग लड़कर दोबारा जिंदगी पाई है। 23 अक्टूबर 2015 में राजमार्ग स्थित गुराड़ी बंगले के समीप ओवरलोड बस और डंपर की टक्कर से 9 लोगों की मौत हो गई थी। दर्जन भर लोग घायल हुए थे। उनके परिजन को न तो आजतक ठीक से कोई शासकीय तौर पर सहायता मिल पाई है और न ही दोषियों पर कार्रवाई हो सकी है। जर्जर हाल सड़क मार्ग हादसों का कारण बन रहे हैं। सड़कों में बने गड्ढे, सफेद पट्टी का न होना तथा स्पीड ब्रेकर व मोड़ से पूर्व कोई संकेतक नहीं होने से भी हादसों को बढ़ावा मिल रहा है। राजमार्ग पर हर साल बड़े हादसे इसी वजह से होते हैं। यहां कई जगह सड़क मार्ग टूटा हुआ है, उज्जैन से लेकर चंवली तक कई जगह तो डेंजर जोन का रूप ले चुकी है। जहां साल में दर्जन भर दुर्घटनाएं होना वाजिब है।

सुरक्षा मानकों का रखें ख्याल, वाहन की गति नियंत्रित रखें, ओवरलोडिंग से बचें, नियमों का करें सख्ती से पालन, हाइवे पर सफर के दौरान रहें सतर्क, ड्राइविंग के दौरान फोन का उपयोग न करें।

नगर से गुजरने वाले राजमार्ग पर भी तेज रफ्तार व ओवरलोडिंग से होते हैं हादसे।

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