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स्वास्थ्य केंद्र में सालों से नहीं स्टाफ नर्स, 18 महीने में 651 प्रसूताएं रैफर

गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी इंतजाम...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:40 AM IST
स्वास्थ्य केंद्र में सालों से नहीं स्टाफ नर्स, 18 महीने में 651 प्रसूताएं रैफर
गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के नाम पर कुछ भी इंतजाम नहीं हैं। इसके चलते सुरक्षित प्रसव के बजाए उल्टे प्रसूताओं और शिशुओं की जान भगवान भरोसे रहती है। नगर की 18 हजार से अधिक आबादी और तहसील के करीब 110 ग्रामों के लोगों को स्वास्थ सेवाएं उपलब्ध कराने वाले नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी स्टाफ नर्स नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ नर्स के 6 पद स्वीकृत हैं जो कई सालों से खाली पड़े हैं।

इस कमी के चलते प्रसूती वार्ड में एएनएम तैनात की जाती है। अप्रशिक्षित स्वास्थकर्मियों की तैनाती के चलते कई बार प्रसव कराने में समस्याएं पैदा होती हैं। कई प्रसूताओं को, तो जिला चिकित्सालय के लिए रैफर करना पड़ता है। कई वर्षों से चली आ रही इस समस्या का अंत कब होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

सालों से स्टाफ नर्स की कमी के चलते स्वास्थ्य केंद्र का प्रसूती वार्ड अप्रशिक्षित स्वास्थकर्मियों के भरोसे है। 24 घंटे सुरक्षित प्रसव सुविधा की गारंटी देने वाले स्वास्थ्य केंद्र का प्रसूती वार्ड एएनएम के भरोसे रहता है। इसमें से भी अधिकांश समय पैरामेडिकल की ट्रेनिंग लेने वाली छात्राएं वार्ड को संभालती हैं। यहां तैनात कर्मचारी भी इन छात्राओं के भरोसे बेफिक्र होकर अपने कार्यों में व्यस्त रहती है जो किसी समय प्रसूताओं की जान को खतरे में डाल सकता है। स्वास्थ्य केंद्र में 44 लाख रुपए की लागत से नया मेटरनिटी वार्ड का निर्माण कराया जा रहा है जो लगभग पूरा होने को है। इस वार्ड में एक समय में एकसाथ 30 प्रसूताओं को रखा जा सकेगा, लेकिन इस वार्ड को संभालने के लिए स्टाफ नर्स की व्यवस्था नहीं है।

स्टाफ नर्स का इंतजार करता प्रसूती वार्ड, जहां से मरीजों का कर दिया जाता है रैफर।

18 माह में पहुंची 2496 गर्भवती महिलाएं

पिछले कुछ समय के आंकड़े देखें जाए, तो स्टाफ नर्स की कमी के चलते एक चौथाई के करीब प्रसूताअों को, तो आनन-फानन में रैफर कर दिया गया है। वहीं कुछ नवजात शिशुओं की मौत हो गई। स्वास्थ्य केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 के अप्रैल से दिसंबर तक कुल 1304 महिलाएं प्रसव के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंची हैं, जिनमें से 315 को रैफर किया गया है। 6 शिशुओं की व्यवस्थित प्रसव नहीं करवा पाने से मृत्यु हो गई। वर्ष 2017 के अप्रैल से दिसंबर तक कुल 1192 महिलाएं प्रसव के लिए आईं, जिनमें से 336 महिलाओं को रैफर किया गया। मतलब 18 माह में अस्पताल पहुंची 2496 प्रसूताओं में से अभी तक 651 काे रैफर किया जा चुका है। ऐसे में सरकार सुरक्षित प्रसव के लिए कितनी ही योजनाएं संचालित करे मगर उनकी जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। जिसे इन आकड़ों की मदद से आसानी से समझा जा सकता है।

वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की गई है पद भरने की


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