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शिवाजी काल में 32 साल अकाल पड़ा, फिर भी किसान आत्महत्या को मजबूर नहीं हुए

छत्रपति शिवाजी को अब तक ढाल आैर तलवार के रूप में ही देखा जाता है लेकिन उनके कई पहलू ऐसे भी हैं जो देशवासियों को पता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:55 AM IST

शिवाजी काल में 32 साल अकाल पड़ा, फिर भी किसान आत्महत्या को मजबूर नहीं हुए
छत्रपति शिवाजी को अब तक ढाल आैर तलवार के रूप में ही देखा जाता है लेकिन उनके कई पहलू ऐसे भी हैं जो देशवासियों को पता नहीं है। वह एक कुशल इंजीनियर, प्रबंधक, अर्थशास्त्री, उद्योगपति आदि भी थे। शिवाजी के इन्हीं पहलुओं को अब धीरे-धीरे समाज में लाने का प्रयास किया जा रहा है। शिवाजी के इन पहलुओं को उजागर करने का काम कर रहे हैं शिवाजी की माता राजमाता जिजाऊ के 14वीं पीढ़ी के प्रतिनिधि प्रो. नामदेव राव जाधव।

शनिवार को शहर आए प्रो. जाधव ने भास्कर से विशेष चर्चा में कहा शिवाजी का मैनेजमेंट काफी अच्छा था। उनके शासन काल में वर्ष 1630 से लेकर 1652 तक अकाल पड़ा लेकिन किसी भी किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर नहीं होना पड़ा। उन्होंने किसानों के लिए एक योजना शुरू की, जिसमें किसानों को धन के अलावा बीज उपलब्ध करवाए गए आैर बदले में उनसे फसल का 40 प्रतिशत भाग लेने की घोषणा की। वर्तमान में देश में किसानों की स्थिति दयनीय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित हर देश के शासक को शिवाजी की विचारधारा व कार्यों का अनुसरण करना चाहिए। शिवाजी के काल में महिलाओं का भी काफी सम्मान था। उन्होंने महिलाओं को उस दौर में घोडे की नाल बनाने, तलवार की डिजाइन करने जैसे कार्य में लगाकर बचत से जोड़ा। युवाओं को उन्होंने रोजगार से जोड़कर उद्यम के लिए प्रेरित किया। 40 वर्षीय प्रो. जाधव अब तक शिवाजी के इन्हीं पहलुओं को उजागर करते हुए 32 पुस्तकें लिख चुके हैं।

कार्यक्रम में व्याख्यान देते प्रो. नामदेव राव जाधव। समारोह में पद्मश्री डॉ.मुसलगांवकर का अभिनंदन करते अतिथि।

इतने कुशल इंजीनियर कि 17 साल की उम्र में खुद का डिजाइन किया किला तैयार किया था

स्वर संवाद सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था की महिला शाखा स्वरांगिनी की ओर से शनिवार की शाम संकुल हॉल में छत्रपति शिवाजी महाराज: एक महान इंजीनियर एवं उद्योगपति विषय पर प्रो. जाधव का व्याख्यान रखा गया। इसमें प्रो. राव ने कहा शिवाजी ने 17 वर्ष की आयु में खुद का डिजाइन किया हुआ रायगढ़ किला तैयार किया था। 35 साल में 111 किले बांधना शिवाजी का एक महान इंजीनियर होना दर्शाता है। हाल ही में पद्मश्री पुरस्कार पाने वाले डॉ. केशवराव शास्त्री मुसलगांवकर का सत्कार भी किया। समाज के मिलिंद पन्हालकर, सुहास बक्षी के साथ अतिथियों ने उन्हें सम्मानित किया। मुख्य अतिथि कलेक्टर संकेत भोंडवे आैर माधव विज्ञान महाविद्यालय की प्राणिकी की प्राध्यापिका डॉ. शोभा शौचे थीं। अध्यक्षता डॉ. शशिकांत सावंत ने की। प्रवक्ता अतुल मजुमुदार ने बताया संचालन स्मिता कुलकर्णी ने किया।

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Web Title: शिवाजी काल में 32 साल अकाल पड़ा, फिर भी किसान आत्महत्या को मजबूर नहीं हुए
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