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कला केवल एक अभिनय नहीं बल्कि साधना, युवा कलाकारों को इसकी गंभीरता समझने की जरूरत

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Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 06:00 AM IST
कला केवल एक अभिनय नहीं बल्कि साधना, युवा कलाकारों को इसकी गंभीरता समझने की जरूरत
कला केवल एक अभिनय नहीं बल्कि साधना, युवा कलाकारों को इसकी गंभीरता समझने की जरूरत

कला केवल एक अभिनय नहीं बल्कि एक साधना है। फिल्म हो या थियेटर, किसी भी कला में आने से पहले उसकी साधना जरूर की जाना चाहिए। उसकी गंभीरता को समझना चाहिए। युवा कलाकार धडल्ले से फिल्म आैर टीवी पर आ रहे हैं लेकिन साधना, परिपक्वता आैर गंभीरता के अभाव में वह जल्द ही भीड़ में गुम हो जाते हैं। फिल्म अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी ने भास्कर से विशेष चर्चा में यह बात कही। गोलमाल फिल्म में अंधी चाची मंगला के किरदार पर पूछे गए सवाल पर सुष्मिता ने कहाकि चश्मा पहनने के बाद भी वह पात्र में वैसे ही रहती थीं, जैसे उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता। फिल्म में क्यूं आगे-पीछे डोलते हो...गीत की चर्चा पर सुष्मिता बोलीं कि सुबह मैं आैर परेश रावल जब पहुंचे तो पता चला कि एक गाना रिकॉर्ड करना है। कॉरियोग्राफर गणेश ने सिर्फ इतना कहाकि इस गाने में कोई स्टेप नहीं है। बस जैसा आता हो, वैसा करते जाइए। इस तरह वह गाना रिकॉर्ड हुआ आैर फिल्म रिलीज होने पर सुपरहिट हो गया। सुष्मिता के अनुसार थियेटर से वह कभी अलग नहीं हुईं। एक कंपनी भी वह चलाती रहीं। इसलिए थियेटर से उनका जुड़ाव कभी खत्म नहीं हुआ। इस साल उनकी ले ले मेरी जान फिल्म रिलीज होगी। उज्जैन में सुष्मिता दूसरी बार आईं। इसके पहले शरद शर्मा के आग्रह पर उन्होंने 1993 में उज्जैन में नाट्य प्रस्तुति दी थी।

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