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होली खेल रयो महाकाल, फागुन आयो रे..

होली दहन के ठीक बाद महाकाल मंदिर प्रांगण में प्रसिद्ध भजन गायक भोपूजी की भजन संध्या आरंभ हुई। भोपूजी ने होली खेल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 06:00 AM IST

होली खेल रयो महाकाल, फागुन आयो रे..
होली दहन के ठीक बाद महाकाल मंदिर प्रांगण में प्रसिद्ध भजन गायक भोपूजी की भजन संध्या आरंभ हुई। भोपूजी ने होली खेल रयो महाकाल, फागुन आयो रे भजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने सांवरा बिहारी आया फागुन का मस्त महीना। होली खेले कृष्ण कन्हैया, मीठे रस से भरियो री राधा रानी लागे, आज बिरज में होली रे रसिया जैसे कई भजन व धार्मिक गीत की प्रस्तुति दी। इस दौरान प्रांगण में उपस्थित हजारों भक्तों ने भोपूजी के भजनों पर नृत्य करते हुए होली खेली। इस दौरान प्रांगण में फूलों की पंखुड़ियां हर्बल गुलाल भी खूब उड़ाई गई। रात 11 बजे शयन आरती तक मंदिर में होली की धूम रही।

भास्कर संवाददाता | उज्जैन

रोज भस्मी रमाने वाले राजा महाकाल फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा गुरुवार की साँझ लाल गुलाल से सराबोर नजर आये। परंपरा अनुसार भक्तों ने सबसे पहले महाकाल के आंगन में होली खेलकर पर्व की शुरुआत की। पण्डे-पुजारियों ने गर्भगृह में सांध्य आरती से पहले बाबा को शकर की माला चढ़ाई, गूंजे का भोग लगाया। भांग, ड्रायफ्रूट का श्रृंगार व सोने चाँदी के आभूषण से राजसी वेशभूषा में सजाया। और फिर बाबा पर गुलाल उड़ाकर होली खेली। कुछ ही देर में पूरा गर्भगृह गुलाल से लाल हो गया। शाम 7.30 बजे ढोल-नगाड़े, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच जैसे ही पुजारी ने सांध्य आरती शुरू की। मंदिर जयकारों से गूंज उठा और नंदीहॉल व बेरिकेड्स में जमा हजारों भक्तों ने एक दूसरे पर रंग, गुलाल व फूलों की वर्षा कर जमकर होली खेली।

महाकाल में सबसे पहले जली लकड़ी और कंडो की होली

महाकाल मंदिर में होली की शाम संध्या आरती के बाद सबसे पहले प्रदोष काल में लकड़ी व कंडो से सजी होली जलाई गई। इसके पहले शासकीय पुजारी पंडित घनश्याम गुरु ने होलिका का मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया। पूजन में संभागायुक्त एमबी ओझा, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक अवधेश शर्मा सहित कई विशिष्टजन शामिल हुए। हजारों भक्तों की मौजूदगी में होलिका का पूजन संपन्न होने के बाद होलिका का दहन किया गया। दहन के पश्चात मंदिर प्रांगण में उपस्थित श्रद्धालुओं ने होली की परिक्रमा की।

महाकाल में होली..

7.40

बजे जली होली

11

क्विंटल फूल बरसाए

05

क्विंटल हर्बल गुलाल उड़ाई

03

घंटे चली भजन संध्या

सिंहपुरी में पांच हजार कंडों की होली सजी, पूजन के लिए उमड़ी महिलाएं

पुराने शहर के सिंहपुरी क्षेत्र में 5000 कंडों की होली सजाई गई। प्रदोष काल में शाम 7:30 बजे बाद से यहां महिलाएं बड़ी संख्या में होलिका पूजन करने के लिए उमड़ी। पंडितों ने महिलाओं का पूजन कराया। पंडित पंकज दुबे ने बताया कि ब्रह्म मुहूर्त में चकमक पत्थर से अग्नि जलाकर होली दहन की जाएगी। संतोषी माता में होलिका की गोद में प्रह्लाद की झांकी सजाई गई। यहां भी महिलाएं पूजन के लिए पहुंची। रामघाट पर नारियल की होली सजाई गई। इसके साथ ही शहर भर में 200 से अधिक जगह पर होली की झांकी सजाई गई है जहां देर शाम से रात तक पूजन के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा।

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