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नारी के अंतर्मन की कथा बयां करता नाटक नारीबाई

नारी की वेदना, उसकी कथा, नि:शब्द होकर भी उसके चेहरे पर बयां होने वाला दर्द। ऐसी ही कहानी शब्दों में बुनकर सशक्त...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 06:00 AM IST
नारी की वेदना, उसकी कथा, नि:शब्द होकर भी उसके चेहरे पर बयां होने वाला दर्द। ऐसी ही कहानी शब्दों में बुनकर सशक्त अभिनय के साथ मंच पर आई तो दर्शकों की आंखों में भी वेदना के आंसुओं की छलछलाहट हो गई। अभिनय रंगमंडल के राष्ट्रीय नाट्य समारोह-2018 उज्जैन/इंदौर के अंतर्गत गुरुवार की शाम नाटक कंपनी मुंबई की ओर से अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी द्वारा लिखित, निर्देशित आैर अभिनीत नाटक नारीबाई का मंचन हुआ। सुष्मिता ने इसमें एकल अभिनय से पूरे समय दर्शकों को बांधे रखा। बुंदेलखंड की एक बेड़नी (वैश्या) आैर एक ब्लॉग लेखक के साथ एक महिला सूत्रधार से जुड़े इस नाटक में एक आैरत की व्यथा आैर कहानी को बताया गया। सच्ची कहानी पर आधारित इस नाटक में अंग्रेजी आैर ब्रज भाषा का मेल किया गया। नाटक में सुष्मिता मुखर्जी ने अपनी स्कूल दोस्त सुनयना की जिंदगी को दर्शाया, जो बहुत पढ़ी-लिखी आैर अमीर है। उसका पति उसे वैश्या नारीबाई पर नॉवेल लिखने को कहता है। सुनयना अपनी अमीरी को छोड़कर उसके कच्चे घर में जाकर रहने लगती है। उसे वहां काफी गंदा माहौल दिखाई देता है। वहां रहने वाले लोग आैर बातचीत के तरीके को भी वो करीब से देखती है। इन सब बिंदुओं को सुनयना अपनी कहानी में लिखती है। इसके साथ ही एक आैरत आैर बाजार के बीच का रिश्ता एवं इंसान से सामान बन जाने की कहानी जन्म लेती है।

नाट्य प्रस्तुति देतीं सुष्मिता।