• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Ujjain
  • एक घंटे तक बताई निगम की अव्यवस्था, कांग्रेस पार्षद दल ने निगमायुक्त से कहा भ्रष्ट अफसरों को हटाने का स्वच्छता अभियान चलाओ
--Advertisement--

एक घंटे तक बताई निगम की अव्यवस्था, कांग्रेस पार्षद दल ने निगमायुक्त से कहा भ्रष्ट अफसरों को हटाने का स्वच्छता अभियान चलाओ

नगर निगम में भ्रष्टाचार को लेकर गुरुवार को कांग्रेस पार्षद दल ने निगमायुक्त डॉ. विजयकुमार जे को घेरा। करीब एक घंटे...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 06:00 AM IST
नगर निगम में भ्रष्टाचार को लेकर गुरुवार को कांग्रेस पार्षद दल ने निगमायुक्त डॉ. विजयकुमार जे को घेरा। करीब एक घंटे की बातचीत के दौरान विपक्षी पार्षदों ने कहा- निगम में भी भ्रष्ट अफसरों को हटाने का स्वच्छता अभियान चलाएं। उन्होंने स्वच्छता अभियान के चलते रुके निर्माण कार्य चालू करने, शहर में पेयजल व्यवस्था सुधारने की भी मांग की। बुधवार को जोन एक में सहायक यंत्री चंद्रकांत शुक्ला को लोकायुक्त दल द्वारा रिश्वत लेते गिरफ्तार करने पर भाजपा के निगम अध्यक्ष सोनू गेहलोत ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी कि यह असली स्वच्छता अभियान है। निगम परिषद भाजपा की है। इसलिए निगम अध्यक्ष की इस टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पार्षद दल ने भी यह मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र वशिष्ठ ने कहा- निगम में भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। हाल ही में निगम के पूर्व कर्मचारी को भ्रष्टाचार मामले में सजा हुई है। निगम के कई अफसर लोकायुक्त जांच के घेरे में हैं। पार्षद दल के अनुसार शहर के वार्डों में कई कॉलोनियों ऐसी हैं जहां पर पहुंच मार्ग, नालियां ही उपलब्ध नहीं है जिसके कारण वर्षों से निवासरत रहवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में तो इनका जीवन यापन मुश्किल हो जाता है। कई वार्डों में महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों का टेंडर होकर वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है परंतु ठेकेदारों द्वारा कार्य समय पर प्रारंभ नहीं किए जा रहे हैं जिसके कारण शहर के निर्माण कार्य अवरूध्द हो गए और रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षद की सहमति के बाद ही निर्माण कार्यों को मंजूरी दें

राजेन्द्र वशिष्ठ ने कहा कि वार्डों के अंतर्गत कई निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी जा रही है, ऐसे निर्माण कार्यों की स्वीकृति दी गई जिसकी आवश्यकता नहीं है। मेयर इन कौंसिल नियम 1998 वित्तीय अधिकार धारा 5 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अन्य जनप्रतिनिधियों के वार्डों में किये जाते हैं तो उस वार्ड के क्षेत्रीय पार्षद की लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होगी। नगर निगम एक लोकल गवर्मेंट है, ऐसी स्थिति में क्षेत्र के पार्षदों को इस बात का ज्ञान होता है कि कहां पर निर्माण कार्य आवश्यक है कहां पर नहीं। किसी जनप्रतिनिधि द्वारा करोड़ो रूपये के कार्यों की अगर सूची दी जाती है और उस पर नगर निगम कार्यवाही करती है तो यह कार्य नगर निगम नियमों एवं विधानों के विरूध्द होगा। निगम कमिश्नर से मांग की कि इस संबंध में नगर पालिक निगम से संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाए कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा अन्य जनप्रतिनिधियों के वार्डों में निर्माण कार्य किये जाते हैं तो उसकी लिखित स्वीकृति संबंधित वार्ड पार्षद से ली जावे।

शहर में गंदा पानी वितरण

वशिष्ठ के अनुसार शहर में एक दिन छोड़कर जल प्रदाय किया जा रहा है वह भी गंदा। कुछ समय बाद गर्मी शुरू होने वाली है, ऐसे में स्थिति और भीषण होने की आशंका है। गंदे पानी के कारण बच्चों को गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। कई कॉलोनियों, बस्तियों के लोगों को तो पीने का पानी तक नसीब नहीं हो पा रहा। करोड़ो खर्च कर नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ा गया लेकिन जब जरूरत है तब शहर की जनता को नर्मदा के पानी से वंचित रखा जा रहा है। शहर के वार्डों की कई कॉलोनियों, गलियों में पानी की पाईप लाईन डालने हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित करने की भी आवश्यकता है। पार्षद माया राजेश त्रिवेदी, जफर एहमद सिद्दीकी, आत्माराम मालवीय, रहीम लाला, गुलनाज नासिर खान, प्रमिला मीणा, सपना सांखला, हिम्मतसिंह देवड़ा, रेखा गेहलोत, मीना जितेन्द्र तिलकर, ताराबाई मालवीय ने कहा कि सभी वार्डों में अधिकतर हैंडपंप खराब हैं तो कुछ बंद पड़े हैं जिसकी तरफ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। शहर की अनेकों बस्तियों एवं निचली बस्तियों में पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है।