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इको सिस्टम के लिए मकड़ियां भी बेहद जरूरी

जिस तरह जंगल में शेर सबसे पहले स्थान पर आता है, वैसे ही इको सिस्टम के लिए मकड़ियां भी जरूरी होती हैं। नॉर्मल इको...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:45 AM IST
जिस तरह जंगल में शेर सबसे पहले स्थान पर आता है, वैसे ही इको सिस्टम के लिए मकड़ियां भी जरूरी होती हैं। नॉर्मल इको सिस्टम में मकड़ियां बेहद जरूरी होती है। इको सिस्टम में संतुलन बनाने के लिए यह कारगर है।

विक्रम विश्वविद्यालय की पर्यावरण अध्ययनशाला में जैव विविधता: आवश्यकता एवं रणनीति विषय पर गुरुवार से शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में यह बात इंदौर होल्कर साइंस कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. विपुल कीर्ति शर्मा ने कही। कार्यशाला के पहले सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. शर्मा ने मकड़ियों की विविधता एवं जीवन शैली विषय की व्याख्या करते हुए कहा कि घरों में इतने बारीक कीट भी होते हैं, जिनका भक्षण मकड़ियां करती हैं। इसलिए मकड़ियों की विभिन्न प्रजापतियों को भी सहेजने की आवश्यकता है। उन्होंने मकड़ियों की अलग-अलग प्रजातियों की भी जानकारी दी। सत्र में विक्रम विश्वविद्यालय की वनस्पति अध्ययनशाला के प्रो. आरसी वर्मा ने जीव उत्पत्ति विषय पर व्याख्यान दिया। इसके पहले कार्यशाला का शुभारंभ सीसीएफ बीएस अन्नीगेरी, कुलपति प्रो. एसएस पांडेय एवं पूर्व कुलपति प्रो. आरसी वर्मा ने किया। कार्यशाला संयोजक एवं पर्यावरण अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. डीएम कुमावत ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में डॉ. कुमावत, डॉ. हितेंद्र राम एवं डॉ. संतोष शर्मा द्वारा लिखी पुस्तक एवेन्यू ट्रीज ऑफ उज्जैन का भी विमोचन किया गया। दोपहर में हुए दूसरे सत्र में इंदौर के प्रो. किशोर पंवार एवं एसके चंदा के व्याख्यान हुए। डॉ. कुमावत ने बताया कार्यशाला के दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह 10 बजे से एवं दोपहर 2 बजे से दो अलग-अलग सत्र होंगे। शाम 4 बजे कार्यशाला का समापन होगा।

राष्ट्रीय कार्यशाला

विक्रम विश्वविद्यालय की पर्यावरण अध्ययनशाला में जैव विविधता पर विशेषज्ञों ने चर्चा की

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