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एक साल में शिशु मृत्यु दर 8 प्रतिशत घटकर 12.2 पर पहुंची

चरक अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में पिछले पांच साल में शिशु मृत्युदर पहले कम हुई, उसके बाद लगातार तीन साल तक...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:50 AM IST
चरक अस्पताल में संचालित एसएनसीयू में पिछले पांच साल में शिशु मृत्युदर पहले कम हुई, उसके बाद लगातार तीन साल तक बढ़ती गई और बच्चों की मौत का आंकड़ा 380 पर पहुंच गया। वर्ष 2017 में आश्चर्यजनक सुधार आया और मृत्यु का प्रतिशत 20.30 से 12.2 हो गया। यही वजह है कि प्रदेश में शिशु मृत्युदर के मामले में उज्जैन का एसएनसीयू जो कि वर्ष 2016 तक 50 वें स्थान पर था, अब 25 स्थान पर आ गया है। एसएनसीयू की चिकित्सा व्यवस्था को अपडेट किए जाने से यह संभव हो पाया है। एसएनसीयू प्रभारी डॉ.दिलीप वास्के के अनुसार वर्ष 2018 में इसे जारी रखते हुए मृत्यु दर को 10 से 11 प्रतिशत के बीच में लाते हुए पहले स्थान पर लाने का टारगेट है। एसएनसीयू की क्षमता 32 बेड की है।

एसएनसीयू में चिकित्सा व्यवस्था अपडेट करने से सुधरा ग्राफ, 10 से 11 प्रतिशत तक लाने का टारगेट

आंकड़ों में... ऐसे बढ़ी और फिर कम हुई मृत्यु दर

वर्ष 2013-बच्चे भर्ती हुए-2502, मृत्यु दर-12.2 प्रतिशत।

वर्ष 2014-भर्ती बच्चे-2696, मृत्युदर- 14.3 प्रतिशत।

वर्ष 2015-भर्ती बच्चे-2762, मृत्यु दर-16.9 प्रतिशत।

वर्ष 2016-भर्ती बच्चे-1870, मृत्युदर-20.3 प्रतिशत।

वर्ष 2017-भर्ती बच्चे-2791, मृत्युदर-12.2 प्रतिशत।

पिछले साल बेहतर काम हुआ


ये कारण, जिनसे एक साल में दर कम हुई

1. इंफेक्शन फ्री जोन किया गया।

2. डिलीवरी होते ही बच्चे की शिशु रोग विशेषज्ञों से जांच करवाना।

3. एसएनसीयू के प्रोटोकाल का पालन करवाया।

4. सेंक्शन मशीन का ठीक से उपयोग किया जाना, इसमें बच्चे में जमा कफ या गंदगी को मशीन से खींच लिया जाता है।

5. प्री-टर्म यानी कम अवधि में जन्में बच्चों को विशेष चिकित्सा उपलब्ध करवा कर वजन बढ़ाने के प्रयास।

यह है मापदंड

प्रदेश में 10 से 11 प्रतिशत व उज्जैन की दर 12% तक तय है। यानी एक वर्ष में यदि एक हजार बच्चे जन्म लेते हैं तो उनमें से 54 की मृत्यु हो भी जाती है तो उसे मापदंड के अनुरूप माना जाता है।

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