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पीजीआई में ट्रेनिंग के बाद भी दो साल में एक भी बच्चे को यहां नहीं रखा, हालत गंभीर होते ही कर देते हैं रैफर

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:50 AM IST

Ujjain News - चरक अस्पताल में संचालित पीआईसीयू यानी शिशु गहन चिकित्सा इकाई में दो वेंटीलेटर इसलिए उपलब्ध करवाए हैं कि कोई...

पीजीआई में ट्रेनिंग के बाद भी दो साल में एक भी बच्चे 
 को यहां नहीं रखा, हालत गंभीर होते ही कर देते ह
चरक अस्पताल में संचालित पीआईसीयू यानी शिशु गहन चिकित्सा इकाई में दो वेंटीलेटर इसलिए उपलब्ध करवाए हैं कि कोई बच्चा गंभीर हो तो उसे रखा जा सके। चंडीगढ़ के पीजीआई सेंटर में इसकी ट्रेनिंग भी डॉक्टर्स व स्टाफ को दिलवाई जा चुकी है ताकि वेंटीलेटर का संचालन ठीक से किया जा सके। हाल यह है कि दो साल बीत जाने के बाद भी इन पर बच्चों को भर्ती किया जाना तो दूर इन्हें स्थापित तक नहीं किया है। वजह है इनके स्टैंड नहीं लगाया जाना। यहां बच्चा गंभीर हालत में होता है तो उसे इंदौर रैफर कर दिया जाता है। ऐसे में परिजनों को मरीज को निजी अस्पताल में ले जाना पड़ता है, जहां उन्हें रोज 6 हजार से 10 हजार रुपए तक बिल चुकाना पड़ता है। वर्ष 2016 में चरक अस्पताल में पीआईसीयू शुरू किया था, तब यहां वेंटीलेटर की सुविधा दी थी। पीआईसीयू में एक माह से 16 साल तक के गंभीर बच्चों को भर्ती रखा जा सकता है।


कपड़ा लपेटकर कोने में रख दिया वेंटीलेटर

छह साल पहले जिला अस्पताल के आईसीयू में वेंटीलेटर उपलब्ध करवाया था। इसे कपड़े से ढंककर कोने में रख दिया। इस पर मरीज को भर्ती रखना तो दूर, संचालन भी नहीं हो रहा है। आईसीयू में गंभीर मरीजों को ही रखा जाता है, जिन्हें वेंटीलेटर की आवश्यकता पड़ती है तो कपड़े से ढंके वेंटीलेटर का उपयोग करने की बजाय मरीज को यह कहते हुए ड्यूटी डॉक्टर इंदौर रैफर कर देते हैं कि यहां पर वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है। अब तक 216 मरीजों को रैफर किया जा चुका है।

दो साल में 62 बच्चे रैफर : ऐसे बच्चे, जिनकी हालत गंभीर होती है तो उन्हें वेंटीलेटर पर रखना होता है। पीआईसीयू में दो साल में 62 बच्चों को रैफर करना पड़ा है। यहीं पर वेंटिलेटर संचालित किया जाता तो उन्हें रैफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

बच्चों को रैफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी


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 को यहां नहीं रखा, हालत गंभीर होते ही कर देते ह
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