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जयेंद्र सरस्वती ने दिया था वेद रत्न व वेदाध्यायी सम्मान

कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य आचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी के ब्रह्मलीन होने से शहर के विद्वतजन भी स्तब्ध हैं। शहर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 07:40 AM IST
कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य आचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी के ब्रह्मलीन होने से शहर के विद्वतजन भी स्तब्ध हैं। शहर के कई ऐसे विद्वान हैं, जो उनसे नियमित संपर्क में थे। विद्वानों का कहना है कि आचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी जैसे विद्वान आैर धर्मरक्षक को पुन: भारतभूमि पर जन्म लेने की प्रार्थना है, क्योंकि धर्म के प्रति उनका समर्पण अतुलनीय एवं अनुकरणीय था। आचार्यश्री के 75वें अवतार महोत्सव में जून 2010 में शहर के आचार्य केदारनाथ शुक्ल को वेद र| सम्मान आैर पं.श्रेयस कोरान्ने को वेदाध्यायी सम्मान से सम्मानित किया था। अभा विद्वत परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.राजेश्वरशास्त्री मुसलगांवकर ने कहा- आचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी ने धर्म की रक्षा एवं वृद्धि के लिए जीवनभर श्रम किए। शंकर नेत्र चिकित्सालय को आज भारत में कौन नहीं जानता। निजी विश्वविद्यालय आैर निजी चिकित्सालय खोलकर भारत की धर्मप्राण जनता के लिए उन्होंने शिक्षा एवं स्वास्थ की समस्या का निवारण किया। धर्मांतरण को रोका आैर अनेक वेद विद्यालय खोले जो आज भी चल रहे हैं। जयेंद्र स्वामी धर्म के प्रबल स्तंभ थे। ईश्वर उन्हें भारत भूमि पर पुन: धर्म रक्षा हेतु भेजे। आचार्यश्री ब्रह्मलीन होने पर महामालव वेदशास्त्र परिषद के पं.आनंदशंकर व्यास, पं. विनोद पंड्या, पं. महेंद्र दत्त शास्त्री, पं.सोहन भट्ट, डॉ.गोपालकृष्ण शुक्ल, डॉ.महेंद्र पंड्या, डॉ. संतोष पंड्या, प्रो. बालकृष्ण शर्मा, डॉ. कैलाश शर्मा, पं. राजेश त्रिवेदी, महाकाल प्रबंध समिति के पूर्व प्रशासक आनंदीलाल जोशी, सदस्य विभाष उपाध्याय, उज्जयिनी विद्वत परिषद ने स्वामीजी के अवदान पर नमन किया।

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को श्रद्धांजलि : कांचीपुरम मठ के पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ब्रम्हलीन होने पर अखिल भारत हिंदू महासभा ने पुष्पांजलि अर्पित की। प्रदेश अध्यक्ष दिनेश सुगंधी, प्रदेश प्रवक्ता मनीषसिंह चौहान, जितेंद्रसिंह ठाकुर, सुरेश पाठ, नीलेश दुबे, अखंडप्रतापसिंह, मंगलसिंह डाबी, राहुल बोड़ावत, सत्यवीरसिंह, महेंद्रसिंह बैस, आशीष गौड़, हरि माली, नंदकिशोर पाटीदार, कृष्णा मालवीय, राजवीरसिंह चौहान, पवन बारोलिया आदि मौजूद थे।