Hindi News »Madhya Pradesh »Ujjain» 10 साल बाद पंचक्रोशी यात्रा के समापन पर सोमवती अमावस्या के योग में हजारों श्रद्धालुओं ने किया शिप्रा में नहान, अब इस योग का 2028 तक इंतजार

10 साल बाद पंचक्रोशी यात्रा के समापन पर सोमवती अमावस्या के योग में हजारों श्रद्धालुओं ने किया शिप्रा में नहान, अब इस योग का 2028 तक इंतजार

10 साल बाद पंचक्रोशी यात्रा के समापन पर बने सोमवती अमावस्या के खास योग में हजारों श्रद्धालुओं ने सोमवार को शिप्रा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 05:10 AM IST

10 साल बाद पंचक्रोशी यात्रा के समापन पर बने सोमवती अमावस्या के खास योग में हजारों श्रद्धालुओं ने सोमवार को शिप्रा में नहान किया। अब इस योग के लिए श्रद्धालुओं को 2028 तक इंतजार करना होगा। रामघाट सहित आसपास के घाटों पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा में डुबकी लगाई तो बड़े पुल के पास बने प्राचीन सोमतीर्थ कुंड पर लोगों ने फव्वारों में खड़े होकर स्नान किया। पंचक्रोशी यात्रा रविवार को समाप्त हो गई थी। हजारों यात्रियों ने एक दिन की अष्ट तीर्थ यात्रा पूर्ण कर सोमवार को सोमवती के योग में शिप्रा स्नान कर दोहरा लाभ अर्जित किया। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बावाला ने बताया कि वर्ष 2008 में वैशाख मास में पंचक्रोशी यात्रा के समापन पर 5 मई को सोमवती अमावस्या का योग बना था। और 10 साल बाद अब 2018 में यह योग आया। आगे पंचक्रोशी यात्रा के साथ शिप्रा में सोमवती अमावस्या पर नहान का ऐसा योग अब वर्ष 2028 में आएगा। श्री क्षेत्र पंडा समिति रामघाट के अध्यक्ष पं. राजेश त्रिवेदी ने कहा कि इस बार पंचक्रोशी के साथ सोमवती का संयोग होने से यात्रियों ने दो पर्व का लाभ लेकर पितरों के निमित्त पूजन-अर्चन कराया। एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि पंचक्रोशी यात्रा व सोमवती अमावस्या मिलाकर 50 हजार श्रद्धालु पर्व पर उज्जैन में उमड़े। इतनी भीड़ के बावजूद कही कोई घटना नहीं हुई। सुरक्षा व सुविधाएं थी, स्वच्छता में फेल, नदी से लेकर घाट तक फैली थी पूजन सामग्री सोमवती अमावस्या के नहान के दौरान इस बार प्रशासन सुरक्षा व श्रद्धालुओं को मुलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में तो आगे रहा लेकिन स्वच्छता के मामले में फेल हो गया। शिप्रा के नृसिंहघाट, रामघाट से लेकर छोटे पुल तक सभी घाटों पर महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए नीले रंग के छोटे शेड, नदी में गहरे पानी में जाकर नहान नहीं करने के निर्देश लिखे बोर्ड, दत्त अखाड़ा जाने वाली रपट के दोनों ओर पीले बेरिकेड्स, घाट पर रस्से बतौर सुरक्षा के लगाए गए। पुलिस के साथ होमगार्ड जवान और तैराक दल-बल सहित दिखाई दिए लेकिन घाटों पर लोगों द्वारा नहान के दौरान छोड़ी गई पूजन सामग्री, कपड़े, जूते-चप्पल, पॉलीथिन की थैलियां पड़ी थी। नदी में भी पूजन सामग्री तैरती नजर आई। इन्हें हाथोंहाथ साफ करने वाला या उठाने वाला कोई कर्मचारी नहीं था। दोपहर बाद लोगों ने इन्हीं सामग्री के बीच नहान किया।

नदी से घाट तक फैली थी पूजन सामग्री, उठाने वाला कोई नहीं

महाकाल में बाहर से दर्शन

महाकाल मंदिर में पंचक्रोशी व सोमवती अमावस्या पर्व पर उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर प्रबंध समिति ने भस्मारती बाद सुबह 6 बजे से ही गर्भगृह में प्रवेश बंद कर दिया था। दिनभर श्रद्धालुओं ने बाहर बेरिकेड्स से दर्शन किए। सहायक प्रशासनिक अधिकारी एसपी दीक्षित ने बताया कि 25 हजार लोग उमड़े लेकिन दिनभर लाइन बिना रुके लगातार चलती रही।

मंगलनाथ में भातपूजा बंद

श्रद्धालुओं ने मंगलनाथ मंदिर व भैरवगढ़ में कालभैरव और सिद्धवट मंदिर के भी दर्शन किए। यहां भी दिनभर श्रद्धालुओं की लाइन लगी रही। मंगलनाथ के शासकीय पुजारी दीप्तेश दुबे ने बताया दिनभर भीड़ के कारण भातपूजा बंद रखी गई। मंगलवार से पूजा शुरू होगी।

सिद्धवट पर भोजन कराया

सिद्धवट उपपड़ाव पर आमवाला परिवार की ओर से यात्रियों को भोजन कराया गया। इधर श्री पंचकेश्वर महादेव भक्त मंडल ने अनिल गोठवाल की अगुवाई में भक्तों की सेवा की। इसी तरह आनंदेश्वर महादेव मंदिर पर गोपाल राव सोनोने सेवाश्रम की ओर से यात्रियों की सेवा की गई। पंचमुखी हनुमान मंदिर आगर रोड पर भंडारा हुआ। यात्रियों ने यहां भोजन प्रसादी ग्रहण की।

रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की रेलमपेल

रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ थी। ट्रेन के इंतजार में खड़े यात्री।

सीट रोकने की जद्दोजहद में लोगों ने बच्चों को इस तरह खिड़की से घुसाया।

अंदर सीट नहीं मिली तो दो डिब्बों के बीच ही बना ली बैठने की जगह।

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