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स्कूल कैंटीन से बाहर होंगे चिप्स आैर कचौरी-समोसे

स्कूलों की कैंटीन से अब चिप्स आैर समोसा-कचौरी सहित ऐसे खाद्य पदार्थ बाहर होंगे, जो बच्चों के लिए हानिकारक है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:50 AM IST

स्कूल कैंटीन से बाहर होंगे चिप्स आैर कचौरी-समोसे
स्कूलों की कैंटीन से अब चिप्स आैर समोसा-कचौरी सहित ऐसे खाद्य पदार्थ बाहर होंगे, जो बच्चों के लिए हानिकारक है। केंटीन के अलावा स्कूल परिसर के अासपास 50 मीटर के दायरे में भी इन खाद्य पदार्थों को बेचने की अनुमति नहीं होगी। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की ओवर ऑल सिक्योरिटी एंड सेफ्टी को लेकर एक सेफ्टी मैन्युअल तैयार कर गाइड लाइन जारी की है। जिसमें स्कूल कैंपस में विद्यार्थियों की सुरक्षा, केंटीन की हाइजीन, स्कूल की साफ-सफाई, शौचालयों की व्यवस्था, स्कूल बस सुरक्षा सहित कई प्रकार की गाइड लाइन जारी की है। इस गाइड लाइन में बच्चों के स्वास्थ पर भी खास फोकस किया गया है। बच्चों में बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को देखते हुए केवल स्कूल ही नहीं बल्कि इसके आसपास भी 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित किया है, जो बच्चों के लिए हानिकारक हैं।

देवास रोड स्थित एक निजी स्कूल के पास ही इस तरह गुमटी पर चिप्स आैर फ्राइड फूड्स के पैकेट नजर आ रहे हैं।

मैदा आैर फ्राइड फूड्स से बच्चे होने लगते हैं निष्क्रिय

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीएस धवन ने बताया ब्रेड आैर मैदा युक्त खाद्य पदार्थ कम उम्र में खाने से बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ता है। चिप्स, बर्गर, पिज्जा के बढ़ते प्रयोग के कारण पिछले 10 सालों में बच्चों में मोटापा बहुत अधिक बढ़ा है। मोटापा होने से बच्चे ओवर वेट हो जाते हैं आैर शारीरिक एक्टिविटी नहीं कर पाते। इसके कारण वह पढ़ाई के अलावा अन्य कार्यों में भी धीरे-धीरे निष्क्रिय होने लगते हैं, जिससे उनके समग्र विकास पर असर पड़ता है। मोटापा बढ़ने के साथ ही डायबिटीज होने की संभावनाएं भी बढ़ने लगती है और कम उम्र में ही बच्चे इसके मरीज हो जाते हैं।

ये वस्तुएं 50 मीटर के दायरे से बाहर

चिप्स व फ्राइड फूड्स सहित मैदे से बनी खाद्य सामग्री।

डीप फ्राइड फुड्स जैसे समोसा-कचौड़ी, चना भटूरा।

कोल्ड ड्रिंक के अलावा रेडी टू इट नूडल्स, पिज्जा, बर्गर।

हलवाई की दुकान पर बनने वाले सभी प्रकार के मीठे खाद्य पदार्थ। इससे भी मोटापा बढ़ता है।

पोटेटो फ्राइज, कॉन्फेक्शनरी आयटम जैसे पेस्ट्री, केक व अन्य बेक आयटम नहीं बिक सकेंगे।

3 से 6 साल के बच्चों के लिए हो अलग टॉयलेट

एनसीपीसीआर ने जो गाइड लाइन दी है, उसमें पालक यह देख सकेंगे कि छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट्स है या नहीं साथ ही 3 से 6 साल के बच्चों के लिए भी अलग टॉयलेट और अटेंडर होना चाहिए।

गाइड लाइन का पालन करवाएंगे

प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अभय तोमर ने मामले में कहा एनसीपीसीआर ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसका पालन करवाया जाएगा। सभी स्कूलों को इस संबंध में निर्देशित किया जाएगा। इसके बावजूद भी अगर किसी स्कूल के संबंध में शिकायत प्राप्त होगी तो सख्त कार्रवाई करेंगे।

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