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जिला अस्पताल में 14 दिन से डायलिसिस बंद, मरीज बाहर कराने को मजबूर

आरओ सिस्टम खराब होने से जिला अस्पताल के ईएनटी वार्ड में पिछले 14 दिनों से मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही है...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 06:50 AM IST

जिला अस्पताल में 14 दिन से डायलिसिस बंद, मरीज बाहर कराने को मजबूर
आरओ सिस्टम खराब होने से जिला अस्पताल के ईएनटी वार्ड में पिछले 14 दिनों से मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही है क्योंकि मशीन का एक भाग आरओ सिस्टम खराब हो गया है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पताल व निजी सेंटर पर जाना पड़ रहा है। यूनिट में लगी मशीनों के मैंटेनेंस का ठेका आउटसोर्स पर दे रखा है लेकिन कंपनी के इंजीनियरों ने अब तक आरओ सिस्टम का सुधार नहीं किया है। अब जिला अस्पताल प्रशासन कंपनी पर पैनल्टी लगाएगा।

मरीजों को डायलिसिस करवाने के लिए निजी अस्पतालों में नहीं जाना पड़े, उन्हें जिला अस्पताल में ही यह सुविधा मिल सके, इसके लिए 26 जनवरी 2015 को अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के ईएनटी वार्ड में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई। यहां प्रतिदिन 10 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। यूनिट में 4 मई से डायलिसिस बंद है। मशीनों के रख-रखाव का ठेका दिल्ली की कंपनी डीसी हेल्थ सर्विस को दे रखा है, जिसे यूनिट में लगी मशीनों में कोई भी खराबी होने पर सुधार कार्य करना है। आरओ सिस्टम बंद हुए 14 दिन हो गए हैं लेकिन कंपनी ने सुधार कार्य नहीं किया है। इस वजह से मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही है। उन्हें डायलिसिस करवाने में परेशानी अा रही है। सिविल सर्जन डॉ.राजू निदारिया गुरुवार को यूनिट पहुंचे और आरओ सिस्टम की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने ठेका कंपनी के अधिकारियों को मोबाइल लगाकर अल्टीमेटम दिया। उन्हेंं चेताया कि तत्काल आरओ सिस्टम चालू नहीं किया तो कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करवाया जाएगा। उन्होंने इस बारे में कलेक्टर मनीष सिंह को भी अवगत करा दिया है। निजी अस्पतालों में डायलिसिस करवाने के लिए 1500 से 2000 रुपए तक चुकाना पड़ते हैं।

4.92 लाख का ठेका पैनल्टी लगाएंगे

कंपनी को मशीनों के मैंटेनेंस का 4.92 लाख का ठेका भोपाल स्वास्थ्य विभाग ने दे रखा है। सुधार कार्य नहीं किए जाने पर कंपनी पर कार्रवाई का प्रावधान है। जिला अस्पताल प्रशासन ने अब तक ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं की है, जबकि प्रशासन एजेंसी के खिलाफ समय सीमा में काम नहीं करने पर पैनल्टी भी लगा सकता है।

इसलिए करवाई जाती डायलिसिस

किडनी खराब होने पर यह मशीन किडनी का काम करती है। यानी शरीर में इकट्ठा अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर कर बाहर कर दिया जाता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार डायलिसिस मशीन से ब्लड यूरियन व ग्रेटिलीन यूरीन के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं। यदि उन्हें बाहर नहीं किया जाए तो ये खून में सक्रिय हो जाते हैं।

दो दिन में सुधार नहीं तो ब्लैक लिस्टेड

सिविल सर्जन डॉ. राजू निदारिया ने बताया आरओ सिस्टम में खराबी आने से डायलिसिस नहीं हो पा रही है। ठेका कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उस पर रोज के हिसाब से पैनल्टी लगाई जाएगी। कंपनी ने अगर दो दिन में सुधार कार्य नहीं किया तो उसे ब्लैक लिस्टेड किए जाने के लिए लिखा जाएगा।

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