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सीवरेज के लिए 402 करोड़ की योजना फिर भी नाला-नाली के लिए 11 करोड़ का प्रस्ताव
बड़े नालों के साथ शहर के विभिन्न वार्डों में बनाए जाएंगे नाला-नालियां
घरों से निकलने वाले गंदे पानी के निपटान के लिए शहर में 402 करोड़ रुपए की सीवरेज योजना के तहत काम चल रहा है। इसके बावजूद नगर निगम के प्रस्तावित बजट में इस बार नाला-नाली निर्माण के लिए 11 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए हैं। इस मद के तहत शहर के बड़े नालों के अलावा विभिन्न वार्डों में नाला-नालियां बनाई जाएंगी।
एमआईसी में तीन दिन विचार के बाद प्रस्तावित बजट को स्वीकृति दे दी है। अब इस पर नगर निगम परिषद में चर्चा की जाएगी। शहर में सीवरेज के लिए पाइप लाइन डालने का काम अब पुराने शहर में भी शुरू हो गया है। अब तक यह नए शहर तक सीमित था। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य घरों से निकलने वाले गंदे पानी को पाइप लाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाना है। इसी बीच निगम बजट में नाला-नालियों के लिए अलग से मद स्वीकृत कर दिया है। इससे एेसा प्रतीत होता है कि निगम को सीवरेज प्रोजेक्ट पर भरोसा नहीं है। इसके अलावा जरूरत नहीं होने के बावजूद निगम नाला-नाली निर्माण के नाम पर निगम मद रख रहा है। इसे लेकर एमआईसी सदस्यों में भी मतभेद है। एमआईसी सदस्य सत्यनारायण चौहान का कहना है कि सीवरेज योजना के बाद नाले-नाली बनाने के लिए इतना बड़ा मद नहीं रखा जाना चाहिए। उधर एमआईसी सदस्य मांगीलाल कड़ेल का कहना है कि उन्हें विश्वास नहीं है कि टाटा कंपनी सीवरेज का काम कब तक पूरा करेगा। ऐसे में हमारे वार्ड में कच्चा नाला होने से पानी ओवरफ्लो हो रहा है इसलिए नाला-नाली निर्माण के लिए मद रखा जाना चाहिए। निगम आयुक्त ऋषि गर्ग का कहना है कि शहर की जरूरतों के अनुसार उन्होंने विभिन्न िवभागों से जुड़े प्रस्ताव बनाकर भेजे थे। अब इस पर निगम सम्मेलन में विचार किया जाएगा।
इस बार 11 करोड़ रुपए के प्रस्ताव
{ 5 करोड़ के प्रस्ताव शहर के बड़े नाले बनाने के लिए।
{ 5 करोड़ के प्रस्ताव शहर के विभिन्न वार्डों के तहत नाला-नाली बनाने के िलए।
{1 करोड़ के प्रस्ताव वेदनगर में बड़े नाले बनाने के लिए।
तीन साल में केवल नाला-नाली पर इतना खर्च
वर्ष खर्च
2018 10.53
2019 90.12
2020 63.22
(राशि लाख में, निगम बजट के अनुसार)