- Hindi News
- National
- Ujjain News Mp News Abhyudayapuram Pilgrimage First Center In Mp Rajasthan To Teach Jain Philosophy
अभ्युदयपुरम तीर्थ...जैन दर्शन सिखाने का मप्र-राजस्थान में पहला केंद्र
शहर से 10 किमी दूर बड़नगर रोड पर जैन दर्शन सिखाने, पढ़ाने और बच्चों को संस्कारित करने का बड़ा केंद्र विकसित हो रहा है। 25 बीघा जमीन पर स्कूल व छात्रावास भवन, मंदिर व संत आश्रम का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। भोजनशाला और अतिथि निवास का निर्माण अप्रैल में शुरू होगा। आचार्य मुक्तिसागर सूरिश्वरजी का कहना है कि मप्र और राजस्थान में इस तरह का यह पहला केंद्र होगा।
आचार्यश्री बताते हैं कि उज्जैन जैन दर्शन का प्राचीन केंद्र है। यहां से नई पीढ़ी को शुरुआत से जैन संस्कार व शिक्षा देने की शुरुआत करने के लिए अभ्युदयपुरम की कल्पना की गई। 25 बीघा जमीन पर इसका निर्माण चल रहा है। स्कूल भवन व छात्रावास के साथ 45 मंदिरों का संकुल भी तैयार हो गया है। इनमें प्रतिमा स्थापना की जाना है। इसमें एक साल लग सकता है। प्रतिमा कर्नाटक से बन कर आ चुकी है। अभ्युदय पार्श्वनाथ की यह प्रतिमा अद्भुत है जो कीमती पत्थर पर बनाई गई है। इसका निर्माण करने वालों ने जैन सिद्धांतों व नियमों का पालन करते हुए इसे तैयार किया है, इसलिए यह प्रभावी प्रतिमा है। प्रतिष्ठा के बाद यह श्रद्धा का केंद्र बनेगी। मंदिर 45 आगम के आधार पर बना है। इसमें चारों तरफ 44 मंदिर हैं और बीच में नवग्रह मंदिर है। इस तरह का अनूठा मंदिर बन गया है। थ्री इन वन इस संकुल के बन जाने से उज्जैन में यह एक और बड़ा तीर्थ होगा।
250 बच्चों को शिक्षा मिलेगी, 16 अप्रैल से तप साधना शिविर शुरू होगा
इस संकुल में 60 आवासीय मिल कर 250 बच्चों को नर्सरी से 12 वीं तक सीबीएसई पैटर्न पर स्कूली शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। इन बच्चों में जैन के अलावा अन्य समाजों के बच्चों को भी स्थान दिया गया है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के
लिए वाहन व्यवस्था है। इनके लिए यहां कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, लेबोरेटरी और खेल मैदान का प्रबंध किया है। यहां बीएड ट्रेंड शिक्षक पदस्थ हैं। आवासीय बच्चों के लिए जैन नियमों के अनुसार दिनचर्या तय है। वे सूर्यास्त के बाद अन्न-जल आदि नहीं लेते। उनके भोजन का मीनू तय है, जिनमें कंद-मूल निषेध है। आचार्य का दावा है कि बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पौष्टिक और सात्विक है, जो उनकी रुचि को ध्यान में रख कर तैयार किया जाता है। यहां आवासीय व गैर आवासीय बच्चों से न्यूनतम शुल्क लिया जाता है। यहां 16 अप्रैल से तप साधना शिविर लगेगा। इसमें समाजजन, बच्चे, युवा शामिल होंगे। वे डेढ़ महीने तक यहां रहेंगे तथा पूरी तरह साधु जीवन जीएंगे।
बड़नगर रोड पर बन रहा अभ्युदयपुरम तीर्थ।