किसानों की जमीन अधिगृहीत कर राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित होगा बौद्ध स्तूप

Ujjain News - आगररोड से लगे कानीपुरा गांव के खेतों के बीच मौजूद वैश्य टेकरी (बौद्ध स्तूप) का उत्खनन कर वहां राष्ट्रीय बौद्ध...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:41 AM IST
Ujjain News - mp news buddhist stupa will be developed as national monument by acquiring land of farmers
आगररोड से लगे कानीपुरा गांव के खेतों के बीच मौजूद वैश्य टेकरी (बौद्ध स्तूप) का उत्खनन कर वहां राष्ट्रीय बौद्ध स्मारक बनाने की योजना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग भोपाल ने तैयार की है। इसे मंजूरी के लिए केंद्रीय कार्यालय दिल्ली भेजा है। योजना के तहत वैश्य टेकरी के आसपास की जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। इसका मुआवजा दिया जाएगा।

वैश्य टेकरी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है। यहां 1936 में विभाग के एमजी गर्दे ने उत्खनन किया था। इसके बाद इसके नीचे बौद्ध स्तूप होने की पुष्टि की गई थी। यह टेकरी करीब सौ फीट ऊंची और तीन सौ पचास फीट व्यास की है। इसके पास ही दो छोटे टीले हैं। इनके चारों तरफ चौकोर आकार में खाई दिखाई देती है। उत्खनन से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह स्तूप सम्राट अशोक मौर्य द्वारा निर्मित माना गया है। अशोक की प|ी का नाम वैश्य था। उसके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघ मित्रा उज्जैन से ही बौद्ध धर्म का प्रचार करने श्रीलंका गए थे। विक्रम विश्व विद्यालय के पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार अशोक मौर्य अवंति जनपद का 11 साल तक राज्यपाल रहा। उसने अवंति की राजधानी उज्जैन से लेकर खाड़ी देशों तक 84 हजार स्तूपों का निर्माण कराया। उनमें उज्जैन का यह स्तूप सबसे बड़ा है। इस तरह के स्तूप की बनावट कहीं और नहीं मिलती। पुराविदों द्वारा किए गए अध्ययन और उत्खनन से पता चला है कि स्तूप के भीतर मुरम भरी है तथा ऊपर से ईंटों की जुड़ाई की गई है। ईंटों के आकार से अनुमान है कि यह स्तूप ईसा से 300 साल पहले का है। यह कटोरे के समान बनावट का है।

बुद्ध के वस्त्र व आसंदी रखी है

इस स्तूप पर अनुसंधान करने वाले अन्य विद्वानों का मत है कि बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद बंटवारे में अवंति को तथागत का चीवर (वस्त्र) तथा आसंदी मिली थी, जिस पर स्तूप का निर्माण किया। अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के डॉ आरसी ठाकुर के संग्रहालय में बौद्ध आकृति का सबसे पुराना सिक्का है जो ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी का है। संग्रहालय में अन्य सिक्के भी हैं। बौद्ध ग्रंथों में चार बौद्ध तीर्थ स्थलों की सूची है, जिनमें उज्जैन भी एक है। सोडंग गांव बौद्धाचार्य सोणकुटिकण्ण का कार्यक्षेत्र रहा है, जहां से अब भी बौद्ध पुरावशेष मिलते हैं।

कानीपुरा स्थित वैश्य टेकरी जिसके नीचे बौद्ध स्तूप हैं। नया स्मारक कुछ इस तरह का होगा।

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