बाबू के रिटायर होने से अटक गई पांच अफसरों की चार्जशीट

Ujjain News - उद्यानिकी विभाग में किसानों से जुड़ी योजनाओं में आर्थिक गबन करने के दोषी अफसरों के खिलाफ चार्जशीट पेश करने में दो...

Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 05:01 AM IST
Ujjain News - mp news chargesheet of five officers arrested from babu39s retirement
उद्यानिकी विभाग में किसानों से जुड़ी योजनाओं में आर्थिक गबन करने के दोषी अफसरों के खिलाफ चार्जशीट पेश करने में दो साल पहले बने नए नियम आड़े आ रहे हैं। दरअसल, लोकायुक्त पुलिस घोटाले के दोषी अफसरों के खिलाफ चार्जशीट इसलिए पेश नहीं कर पा रही है, क्योंकि राज्य शासन से अभी तक एक सेवानिवृत्त बाबू पर अभियोजन की मंजूरी नहीं दी है। लोकायुक्त पुलिस बाबू पर अभियोजन की मंजूरी मिलते ही चालान पेश कर सकती है। उद्यानिकी विभाग में आठ से दस साल पुराने घोटाले के तीन मामले पकड़ में आए थे। जिला प्रशासन, लोकायुक्त पुलिस और उद्यानिकी विभाग के बीच सात साल से अभियोजन की मंजूरी और चार्जशीट पेश करने के लिए फाइलें ही चल रही हैंै।

लोकायुक्त पुलिस उज्जैन ने माइक्रो इरीगेशन योजना में फर्जीवाड़े पर संज्ञान लिया था। जांच में फर्म को फर्जी भुगतान, खेतों में ड्रिप नहीं लगने, 8 से 9 लाख रुपए निजी उपयोग में लेने, फर्जी बिल लगाने और भुगतान करने की पुष्टि हुई थी। पुलिस ने 2014 में ड्रिप सिंचाई सिस्टम में आर्थिक अनियमितता मिलने पर तत्कालीन सहायक संचालक एसएल नागर और लेखापाल अब्दुल पठान लतीफ पर केस दर्ज किया था। कार्रवाई के दौरान पठान रिटायर हो गए। लोकायुक्त पुलिस ने रिटायर कर्मचारियों पर कार्रवाई वाले नियम के तहत सरकार से पठान के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मांगी थी, जिसे शासन ने अब तक मंजूर नहीं किया है।

जिन किसानों ने आवेदन नहीं किया, उनके नाम से भी जारी हो गई राशि

लोकायुक्त पुलिस ने 2013 में मंदसौर में पदस्थ तत्कालीन सहायक संचालक एसएल नागर, वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी एनएल माल, मोहन डोडवे और प्रदीप कुमार मौड पर केस दर्ज किया था। इन अफसरों ने 2010-11 और 2011-12 में किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग योजना में अनुदान देने के नाम पर गड़बड़ी की थी। जांच में खुलासा हुआ था कि जिन किसानों को योजना से फायदा मिलना दिखाया गया, दरअसल उन्होंने आवेदन किया ही नहीं था। लोकायुक्त ने 2014 में अफसरों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मांगी थी, जिसकी मंजूरी जुलाई 2018 में प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने दे दी थी। वहीं मंदसौर-विदिशा में बड़ी संख्या में किसानों के नाम पर धनिया, दवा और पैसा चढ़ा दिया गया, जो उन्होंने लिया ही नहीं था। इस मामले में तत्कालीन प्रभारी अधिकारी एपी सिंह और वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी रवींद्र कुमार शर्मा को भी दोषी पाया गया था। इनकी अभियोजन स्वीकृति भी हो चुकी है, लेकिन एक बाबू के खिलाफ अभियोजन मंजूरी नहीं मिलने से इन पांच अफसरों का चार्जशीट अटक गई है।


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