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मुख्य सचिव ने पूछा- कान्ह का पानी शिप्रा में मिलने से कैसे रोकंे

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 05:01 AM IST

Ujjain News - मुख्य सचिव एसआर मोहंती त्रिवेणी पर शिप्रा नदी के पानी की व्यवस्था देख रहे थे तो उन्हें नर्मदा घाटी विकास...

Ujjain News - mp news chief secretary asked how to prevent kanh39s water from meeting in shipra
मुख्य सचिव एसआर मोहंती त्रिवेणी पर शिप्रा नदी के पानी की व्यवस्था देख रहे थे तो उन्हें नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य सचिव रजनीश वैश्य ने बताया- यहां पर कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में मिल रहा था, जिसे अभी रोकने के लिए मिट्टी डाली है। यहां पर नगर निगम यदि स्टापडेम बना दे तो स्थाई रूप से गंदे पानी को शिप्रा में मिलने से रोका जा सकता है। मुख्य सचिव मोहंती बोले- कान्ह का तो पानी गंदा है।

संभागायुक्त अजीत कुमार और कलेक्टर शशांक मिश्रा ने उन्हें शिप्रा के पानी की फ्लो की स्थिति बताई। शनि मंदिर में दर्शन करने के बाद राणोजी की छत्री पर पहुंचे, यहां से रामघाट में पानी की स्थिति देखी। पीएचई के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल ने मुख्य सचिव को बताया ड्रेनेज के पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए सदावल में गंदे पानी का ट्रीटमेंट प्लांट है। बारिश में नालियों का पानी उफनकर शिप्रा में मिल गया। उन्होंने यह भी बताया कि निगम ड्रेनेज सिस्टम पर काम कर रहा है, यह काम पूरा होने पर ड्रेनेज के पानी को रोकने में मदद मिलेगी।

कैंसर यूनिट नहीं पहुंच पाए

मुख्य सचिव का कैंसर यूनिट जाने का कार्यक्रम निर्धारित था। मुख्य सचिव बृहस्पति भवन में बैठक व प्रेस से चर्चा के बाद महाकाल में दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां देर होने से कैंसर यूनिट में नहीं पहुंच पाए।

राणोजी की छत्री से रामघाट का अवलोकन करते मुख्य सचिव माेहंती।

7 एमसीएफटी लिया था, पीने में उपयोग के लिए 35 एमसीएफटी पानी दिया

मोहंती ने बताया गंभीर डेम का पानी पीने में उपयोग के लिए है। इमरजेंसी में सात एमसीएफटी पानी रामघाट के लिए लिया है। इसके बदले 35 एमसीएफटी पानी नर्मदा का दे दिया है। पीने के पानी की समस्या नहीं आनी चाहिए। त्रिवेणी और रामघाट पर कितने भी यात्री आए, हमें मतलब नहीं है। वहां कोई कमी नहीं रहना चाहिए। मोहंती ने बताया नर्मदा-शिप्रा लिंक प्रोजेक्ट कोई छोटा काम नहीं है। नर्मदा के पानी को यहां तक लाने के लिए बड़ा एफर्ट लगाया है। इसे हम स्थाई समाधान की शुरुआत मान सकते हैं और भी योजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने कहा शिप्रा में गंदे नाले मिलने की समस्या सीवरेज प्लान लागू होने के बाद समाप्त हो जाएगी। उज्जैन में प्रदेश की सबसे अच्छी सीवरेज योजना लागू की जा रही है।

सिंहस्थ में कुछ गलत हुआ तो कार्रवाई होगी

मुख्य सचिव ने एक सवाल के जवाब में कहा सिंहस्थ 2016 में कुछ गलत हुआ है तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा प्रदेश में किसी भी योजना के लिए पैसे की कमी नहीं आने दी जाएगी। किसानों की ऋण माफी 15 जनवरी से होगी। प्रदेश की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए राजस्व बढ़ाने पर गंभीरता से मंथन हो रहा है।

महाकाल मंदिर में स्थाई प्रशासक की उम्मीद

महाकालेश्वर मंदिर समिति का पूर्णकालिक स्थाई प्रशासक नियुक्त होने की संभावना है। मोहंती को स्थाई प्रशासक की नियुक्ति के लिए कहा तो उन्होंने सहमति जताई। मंदिर में अभी यूडीए सीईओ अभिषेक दुबे को प्रशासक की भी जिम्मेदारी दी है। मोहंती ने महाकालेश्वर की पंचामृत पूजा की व हनुमान मंदिर में भी दर्शन किए।

नर्मदा का पानी आने से लबालब त्रिवेणी स्टाप डेम से शाम को पानी छोड़ा।

कान्ह डायवर्सन योजना परफेक्ट- जुलानिया

कान्ह डायवर्सन के सवाल पर जल संसाधन के अपर मुख्य सचिव आरएस जुलानिया ने कहा- कान्ह डायवर्सन योजना परफेक्ट है। कान्ह के पानी को इंदौर और सांवेर में ट्रीट कर कान्ह डायवर्सन के माध्यम से कालियादेह के पास नदी में छोड़ा जाता है। योजना में क्षमता से ज्यादा पानी निकल रहा है। बारिश में कान्ह का पानी नदी से ही निकलेगा।

एनवीडीए के अतिरिक्त मुख्य सचिव का जवाब- त्रिवेणी पर स्टापडेम बना दे नगर निगम

नर्मदा का 70 एमसीएफटी पानी आया, त्रिवेणी और गऊघाट का जलस्तर बढ़ा

संक्रांति के लिए त्रिवेणी से 43 किमी दूर देवास के शिप्रा डेम से शनिवार शाम 6.30 बजे से रविवार दोपहर 1 बजे तक 17 घंटे में 2.38 एमसीएम यानी 70 एमसीएफटी पानी छोड़ा गया। पानी तेज रफ्तार से बहता हुआ रात 2.30 बजे किठोदा डेम पार कर सुबह त्रिवेणी पर भरे पानी में जा मिला। शाम 4 बजे त्रिवेणी डेम का लेवल 8 फीट से 14 फीट हो जाने से 7 गेट खोल दिए गए। यहां से पानी गऊघाट स्टापडेम पहुंच गया, जिससे रात 8 बजे तक गऊघाट का लेवल 8.4 फीट हो गया। रामघाट पर पानी का लेवल 4.5 फीट रखा है, जिसे गंभीर डेम के पानी से भरा गया है। पुलिस और राजस्व विभाग के अमले की निगरानी में शिप्रा डेम से पानी छोड़ा। डेम और त्रिवेणी के बीच स्थित 13 स्टापडेमों के गेट खुले रखे। रात ढाई बजे यह किठौदा डेम पार कर त्रिवेणी की ओर बहने लगा। त्रिवेणी पर पानी बढ़ने की शुरुआत हालाकि सुबह 9 बजे से हुई। शाम 4 बजे तक लेवल कान्ह पर बनाए मिट्‌टी के डेम के लेवल (14 फीट) तक पहुंचने लगा तो त्रिवेणी के गेट खोले गए। गऊघाट और त्रिवेणी स्टापडेम यदि पूरी क्षमता से भर जाते हैं तो यहां 90 एमसीएफटी पानी भर सकता है।

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