विद्यार्थियों के लिए पांचवीं-आठवीं अब भी लोकल, दो प्रश्नपत्रों में छह हजार से ज्यादा अनुपस्थित, असर- रिजल्ट बिगड़ना तय
11 साल बाद बोर्ड पैटर्न पर हो रही 5वीं आैर 8वीं की परीक्षाओं का रिजल्ट बिगड़ना तय है क्योंकि अब तक हुई दो परीक्षाओं में अनुपस्थित विद्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि अब किसी भी स्थिति में बेहतर रिजल्ट की उम्मीद नहीं की जा सकती।
4 आैर 9 मार्च को हुई परीक्षाओं में 5वीं एवं 8वीं में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या 6 हजार से भी अधिक है। स्कूल से दूर बनाए गए केंद्र आैर कई स्कूलों में कागजों पर दर्शाई गई विद्यार्थियों की संख्या के कारण अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। लगातार दो प्रश्न पत्रों में अनुपस्थित विद्यार्थियों की संख्या के बाद विभागीय स्तर पर भी अधिकारी इसकी पड़ताल में जुट गए हैं।
डीईओ का पत्र - शिक्षकों की केंद्रों पर उपस्थिति अत्यंत आपत्तिजनक
} डीईओ रमा नाहटे ने सभी संकुल प्राचार्य को पत्र जारी करते हुए लिखा कि परीक्षा में पहले ही दिन निरीक्षण के दौरान यह पाया कि परीक्षा केंद्रों पर उन संस्थाओं के भी शिक्षक उपस्थित हैं, जिन संस्थाओं के विद्यार्थी केंद्र पर परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत आपत्तिजनक है। }पत्र में निर्देश जारी किए हैं कि परीक्षा दिवस में परीक्षा केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष एवं केंद्र पर नियुक्त पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त कोई भी शिक्षक उपस्थित नहीं रहेगा। }परीक्षा केंद्र से संलग्न प्रावि आैर मावि की पहली से चौथी आैर 6टीं-7वीं की कक्षाएं सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच परीक्षा दिवस में लगाई जाए। ऐसे शिक्षक, जिनकी परीक्षा में ड्यूटी नहीं है, वे कक्षा संचालन के बाद परीक्षा केंद्र पर उपस्थित नहीं रहेंगे।
अनुपस्थित विद्यार्थियों की संख्या शहर में ही अधिक
4 मार्च को हुई 5वीं की हिंदी विषय की परीक्षा में जिले में कुल 13735 में से 1326 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। उज्जैन (शहर) विकासखंड के अंतर्गत 1512 विद्यार्थियों में से 358 अनुपस्थित रहे। वहीं 9 मार्च को हुई सामान्य अंग्रेजी विषय की परीक्षा में जिले में 1367 आैर शहर में 368 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। इधर कक्षा 8वीं में 4 मार्च को हुई हिंदी विषय की परीक्षा में जिले में 15352 में से 1731 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। शहर में 1791 विद्यार्थियों में से 284 अनुपस्थित रहे। वहीं 9 मार्च को हुई विज्ञान की परीक्षा में जिले में 1606 आैर शहर में 299 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे।
परीक्षा में विद्यार्थियों की घटती संख्या की यह तीन बड़ी वजह
01. कुछ स्कूल प्रधानाध्यापकों ने विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा दिखाने के लिए फर्जी पंजीयन दिखाए। पोल परीक्षा में खुल रही है।
02. स्कूलों के लिए दूसरे स्कूलों में केंद्र बनाए गए हैं। कई स्कूलों के 4-5 किलोमीटर दूर केंद्र हैं। इस कारण भी विद्यार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंच पा रहे हैं।
03. स्कूलों को ही यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह विद्यार्थियों को वाहनों से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए लेकिन संबंधित स्कूल के शिक्षकों द्वारा रुचि नहीं लिए जाने के कारण विद्यार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इधर जिला परियोजना समन्वय पीएस सोलंकी ने कहा अनुपस्थित विद्यार्थियों का आंकड़ा उज्जैन (शहर) विकासखंड में ही सबसे अधिक है। बीआरसी को विश्लेषण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
स्कूल में 51 विद्यार्थी दर्ज, परीक्षा देने पहुंचे 15
स्कूल का नाम दर्ज विद्यार्थी अनुपस्थित
माध्यमिक विद्यालय कार्तिक चौक 51 36
कन्या माध्यमिक विद्यालय नलिया बाखल 76 24
नूतन देसाई नगर 15 04
प्राथमिक विद्यालय देसाई नगर 16 03
माध्यमिक विद्यालय फाजलपुरा 45 12
माध्यमिक विद्यालय बुधवारिया 45 04
कन्या मावि हीरा मिल की चाल 11 03
माध्यमिक विद्यालय सुदामा नगर 26 04
बीएमएस ताजपुर 50 12
माध्यमिक विद्यालय दताना 52 05
माध्यमिक विद्यालय गंगेड़ी 27 03
(जिले में 9 मार्च को हुई परीक्षा के आंकड़े पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर।)