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पन्नी बिनती थी, अब खुद का व्यवसाय, कचरा वाहन पर चल लोगों को दी सफाई की सलाह

एक वर्ष पहले
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शहर की स्वच्छता में योगदान देने और खुद के दम पर आत्मनिर्भर बनी विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं का नगर निगम ने रविवार को सम्मान किया। मौका था-अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का। परिषद हॉल में महापौर मीना जोनवाल ने ऐसी 25 महिलाओं का हौंसला बढ़ाया। उन्हें सम्मानित किया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर हम समान तो देश महान अभियान के तहत आयोजित समारोह में महापौर ने कहा महिला सम्मान तब ही सार्थक होगा जब हम पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं का सहयोग करते हुए उन्हें अवसर प्रदान करें। मुख्य अतिथि डाॅ. सतिंदर कौर सलूजा थीं। अपर आयुक्त मनोज पाठक और पूनम गर्ग ने भी संबाेधित किया। समारोह में स्वच्छता के क्षेेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली डिवाइन, ओम सांई विजन और ग्लोबल वेस्ट मैनेजमेंट के साथ निगम कार्यालय व जोन के अलावा फिल्ड पर काम करने वाली उपयंत्रियों को सम्मानित किया। मंच से उनके अनुभव भी साझा किए गए।

वे महिलाएं जो दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं, कभी चाहरदीवारी में करती थी काम


स्वयं सहायता समूह से जुड़ किया खुद का काम

यह हैं तनूजा बाई, एक साल पहले पन्नी बीनने का काम करती थी। फिर नैंसी स्व सहायता समूह से जुड़ीं। बचत की प्रवृत्ति विकसित की। खुद का व्यवसाय शुरू कर समूह से ऋण लेकर अंडे का व्यवसाय शुरू किया। वे अंडे का ठेला लगाती हैं। परिवार के भरण-पोषण में योगदान दे रही हैं। बच्चों को व्यवसाय सिखा रही हैं।

झाडू बनाती थी, बचत कर स्वावलंबी बनीं

गंगाबाई को झाडू बनाने में महारथ तो थी लेकिन पूंजी की कमी से वे इसे बढ़ा नहीं पा रही थी। वे भूमिजा स्व सहायता समूह से जुड़ी। आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें समूह बैंक ऋण के जरिए ऋण मिला और अब वे स्वावलंबी जीवन बिता रही हैं। झाडू व्यवसाय को बढ़ाने के साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ रही हैं।

लोगों को समझाया गीला -सूखा कचरा अलग करें

गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करने के निगम के अभियान में विनीता शर्मा निजी एजेंसी के जरिए जुड़ी। वे वार्डों में जाकर लोगों को गीला-सूखा कचरा अलग करने करने के अलावा उनके महत्व को भी समझा रही हैं। विनीता कहती हैं कि शुरुआत में लोगों ने अनदेखा किया लेकिन अब वे कचरा अलग करने लगे हैं।

पुरुषों की तरह कचरा संग्रहण वाहन पर चलती

डाेर टू डोर कचरा संग्रहण वाहन में अब तक पुरुष ही कचरा संग्रहण करने का काम करते थे। सुमित्रा कटारा वह पहली महिला है, जो यह काम कर रही हैं। वे घरों से कचरा लेने के साथ रहवासियों को समझाती हैं कि गीला कचरा कौन सा और सूखा कचरा कौन सा होता है। कचरा लेने के बाद वे कचरे को अलग-अलग भी करती हैं।

इन महिलाओं का सम्मान भी

मीना चौधरी, वर्षा राजपूत, वंदना जाजोड़, प्रमिला शुक्ला, उर्मिला दुबे, कविता परमार, सोनू मालवीय, सभिना, सलमा, ललिता, मायाबाई, लक्ष्मी बाई, सोनू बाई, अनिता बाई, विधिबाई, शांती बाई, मुुन्नीबाई, प्रवीण बाई, लक्ष्मी टांकले, सिराज बाई, बिन्नो बाई, मुन्नी, शांता बाई, अनिता, मोना बाई, सपना सक्सेना आदि का भी सम्मान किया।
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