पारद शिवलिंग को अर्पित किया सोने का बर्क मात्र 45 सेकंड में समा गया, केवल निशान रहे

Ujjain News - रामघाट के पास सिद्धाश्रम के पारद शिवलिंग पर शक्तिपाताचार्य डॉ नारदानंदजी महाराज ने जैसे ही सोने का बर्क लगाया,...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:40 AM IST
Ujjain News - mp news gold berk offered to parad shivaling only after 45 seconds only marks
रामघाट के पास सिद्धाश्रम के पारद शिवलिंग पर शक्तिपाताचार्य डॉ नारदानंदजी महाराज ने जैसे ही सोने का बर्क लगाया, देखते ही देखते 45 सेकंड में वह शिवलिंग में समा गया। शिवलिंग पर केवल निशान रह गया। मौजूद श्रद्धालुओं ने जिस इस वाकये को गौर से देखा और फिर जयकारों के साथ शिवलिंग को स्पर्श करने के लिए बेताब हो गए।

स्वामी डॉ. नारदानंदजी ने कहा यह कोई चमत्कार नहीं है। यह विज्ञान है। पारा सोने को सोख लेता है। यह प्रक्रिया उस समय तक चलती है जब तक पारे की सोना सोख लेने की क्षुधा शांत न हो जाए। जिस तक पारा सोना सोखना बंद कर देगा उस दिन वह पारस बन जाएगा। वही पारस, जिससे लोहा भी सोना बन जाता है। लोहा ही नहीं कोई भी धातु उससे सोना बन सकती है। यह प्राचीन विज्ञान है। शास्त्रों में इसकी विधि दर्ज है। काफी अनुसंधान के बाद यह पारद शिवलिंग बनाया है। इसे सोने का भोग देने के प्रयोग सफल रहे। अब इस पर रोज सोने का भोग चढ़ेगा। सुबह 9 बजे स्वर्ण आरती होगी।

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद आयुष मंत्रालय भारत सरकार के बोर्ड मेम्बर तथा एडवांस योग एवं नेचुरोपैथी हॉस्पिटल एवं होम्योपैथी हॉस्पिटल के संचालक डॉ एके द्विवेदी भी मौजूद थे। उन्होंने इसकी पुष्टि की और कहा कि भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय का गठन किया है। पहले यह केवल एक विभाग होता था। मंत्रालय का काम प्राचीन चिकित्सा विधाओं का अनुसंधान करने में मदद करना है। कोई संस्था इस दिशा में काम कर रही है तो वह मंत्रालय को प्रोजेक्ट दे सकती है। मंत्रालय से आर्थिक मदद दी जाएगी। महाराजश्री ने बताया कि पारद शिवलिंग को स्वर्ण ग्रास अर्पित करने से महालक्ष्मी प्रसन्न होती है। मंदिर में पारद शिवलिंग को स्वर्ण ग्रास अर्पित करने की व्यवस्था की गई है। कोई भी श्रद्धालु यहां आकर यह सुविधा ले सकता है।

एकाग्रता के लिए खास

महाराजश्री ने कहा कि उंकार से गंभीर बीमारियों का सफल इलाज हुआ है। आश्रम में बनाए गए डोम को डिजाइन ऐसा किया है कि यहां एक बार उंकार बोलने की 5 हजार आवृत्तियां होती है। यानी 5 हजार बार उंकार बोलने का फायदा एक बार में मिलता है। पारद शिवलिंग एकाग्रता को प्रभावित करता है। इसके आगे बैठ कर ध्यान करने से एकाग्रता का प्रतिशत कई गुना बढ़ जाता है। 25 क्विंटल वजनी यह शिवलिंग इसीलिए खास है।

सोने का बर्क शिवलिंग को अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने कुछ देर इंतजार किया और बर्क शिवलिंग में समा गया। भक्तों ने जयकारे लगाए।

नर और सिंह की ताकत मिल जाए को दानववृत्ति का संहार

कार्यक्रम के दौरान डोम में मौजूद लोगों ने 11 बार ऊंंकार का नाद किया।

इस मौके पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय उंकार नाद के तहत डोम में मौजूद लोगों ने 11 बार ऊंकार नाद किया। विजय कौशिक ने बताया कि उज्जैन पृथ्वी का नाभि केंद्र है, इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए यह आयोजन चार साल से किया जा रहा है। दक्षिण मुखी महाकाल का शिवलिंग पृथ्वी की उत्पत्ति का द्योतक है। शक्तिपीठ हरसिद्धि, मंगलनाथ, कर्कराज जैसे स्थान इसकी प्राचीनता बताते हैं। उंकार नाद का आयोजन नृसिंह जयंती पर करने का आशय यह है कि नर का विवेक और सिंह जैसी शक्ति एकजुट हो जाती है तो तभी बुरी ताकतों को हराया जा सकता है।

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