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गुजरात छीन रहा मालवा के गेहूं का व्यापार

एक वर्ष पहले
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उज्जैन | गेहूं का सीजन कैसे होगा पार। भारी आवक और आगे भाव कमी को लेकर पहली बार यह व्यापार बेपटरी हुआ है। मंडी नीलाम में 2100 रुपए लोकवन 2200 रुपए पूर्णा गेहूं बिका। सीजन का 10 फीसदी भी नया गेहूं नहीं आ पाया है। मार्के वाले गेहूं वालों को इस बार गुजरात कड़ी टक्कर दे रहा है। कम भाव पर पार्टियों को माल भेजा जा रहा है। मालवा से अभी तक गेहूं का व्यापार शुरू नहीं हो पाया। सूत्रों की माने तो मार्के वाले 2200 से 2300 रुपए का पुराना गेहूं लेकर बैठे वह 2000 रुपए हो गया। 200 से 300 रुपए प्रति बोरी का 1500 बोरी 2000 बोरी और 1000 बोरी पर घाटा लगने की खबर है। गेहूं में लाभ भी अच्छा मिला था लेकिन लाभ मार्च तक दिख रहा था। गुजरात की आवक के बाद उज्जैन में नए गेहूं की हजारों बोरी आवक से बगैर व्यापार के व्यापार रोज 50 से 75 रुपए बोरी खरीदारों को उठाना पड़ेगा। उज्जैन मंडी के पुराने कारोबारी जो नाम नहीं बताते उनके अनुसार गीला गेहूं आने से किसानों को भाव कम मिले वहीं हैदराबाद, बैंगलोर मिल क्वालिटी गेहूं बेचने वालों का कटोत्रा ज्यादा होने से लाभ नहीं नुकसान ज्यादा मिल रहा है। नया गेहूं अच्छी क्वालिटी का 25 मार्च के बाद ही दिखाई देगा। 2000, 1925 रुपए के नए गेहूं के भाव किसान ज्यादा खुश करने वाले नहीं बताए गए हैं। लाखों रुपए सोयाबीन, डालर चना, गेहूं व्यापारियों ने स्टॉक में रखा तो नुकसान हो गया। गेहूं का लाभ सोयाबीन, चने में चला गया और नया कर्जदार बना गया।

सोयाबीन बिक्री पर संकट, करोड़ों रुपए जाम, रह गए आधे दाम : करोड़ों रुपए जाम कर बैठा सोयाबीन बिक्री के लिए तैयार नहीं है। लगातार अनेक कारणों से मंदी का आना इस व्यापार के लिए घातक है। 4500 से 4600 रुपए भाव जल्दी ही 3400 रुपए में बदल गए। 2 दिन तक वायदा बाजार में 3 और 4 फीसदी मंदी का सर्किट लगा रहा। शुक्रवार को सुबह 90 रुपए प्लस से इसका व्यापार शुरू हुआ। टॉप सोयाबीन नीलाम में 3583 रुपए बिका। 1000 से 1100 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान देने वाला सोयाबीन को गिरे भाव पर भी खरीदार आनाकानी करने लगे हैं। स्टॉक रोके या बेचे इस पर कोई भी राय नहीं दे रहा है। ब्याज पर धन लेकर स्टॉक करने वाले आखिर कब तक रोकेंगे अप्रैल-मई में मंडियों में गेहूं बिकेगा। वहीं मई के पहले हफ्ते में सोयाबीन की आवक बढ़ जाएगी। नुकसान कम मिले इसके लिए लंबे समय रोकने की रिस्क 50 से 60 फीसदी स्टॉक वाले ले रहे हैं। वर्तमान के भाव पर बेचना अर्थात 1500 रुपए बोरी का नुकसान उठाना ही माना जा रहा है। कोरोनावायरस का िवश्वव्यापी भय फैलने से व्यापार की स्थिति सबसे ज्यादा खराब हो गई है।
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