कस्तूरबा नेे आभूषण बेच बापू को वकील बनाने विलायत भेजा

Ujjain News - साहित्यकार डॉ. जोशी ने पुस्तक ने किया खुलासा, लोकार्पण रविवार को भास्कर संवाददाता | उज्जैन महात्मा गांधी को...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:41 AM IST
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साहित्यकार डॉ. जोशी ने पुस्तक ने किया खुलासा, लोकार्पण रविवार को

भास्कर संवाददाता | उज्जैन

महात्मा गांधी को बैरिस्टर बनाने के लिए विलायत भेजते समय परिवार में धन का अभाव था। जिससे उनको विलायत भेजने में बाधा खड़ी हो गई थी। यह बात जब कस्तूरबा को पता चली तो उन्होंने अपने आभूषण बेचकर तीन हजार रुपए जुटाए। वे तब 19 साल की थी।

शहर के साहित्यकार डॉ. देवेंद्र जोशी ने राष्ट्रमाता कस्तूरबा पर लिखी पुस्तक में इसका खुलासा किया है। जिसका लोकार्पण 19 मई को होगा। डॉ. जोशी के अनुसार कस्तूरबा और महात्मा गांधी का बाल विवाह हुआ था। वे अनपढ़ थी क्योंकि उस समय लड़कियों को स्कूल नहीं भेजा जाता था। आठ राज्यों की दस हजार किलोमीटर की यात्रा के बाद किताब लिखी गई है।

सत्याग्रह में नहीं बुलाने पर नाराज हो गई थी कस्तूरबा

सत्याग्रह आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी के लिए महात्मा गांधी ने महिलाओं को बुलाया लेकिन कस्तूरबा को भूल गए। इस बात पर वे बापू से नाराज हो गई और बोली-मुझे इतना कमजोर कैसे मान लिया। इसके बाद वे आंदोलन में सक्रिय हुई। दस बार जेल गई। उनका जन्म 11 अप्रैल 1869 को माता ब्रजकुंवर और पिता गोकुलदास के यहां काठियावाड़ में हुआ था। 14 साल की उम्र में उनका विवाह महात्मा गांधी के साथ हो गया था। वे बापू से 6 महीने बड़ी थी। 22 फरवरी 1944 को पुणे के आगा खां महल स्थित जेल में उनका निधन हुआ।

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