मेट बिछाए बगैर करा दी खो-खो की स्टेट चैंपियनशिप 25 खिलाड़ियों के घुटने और कोहनियां छील गई

Ujjain News - 65वीं शालेय राज्य स्तरीय क्रीड़ा स्पर्धा के अंतर्गत क्षीरसागर स्टेडियम में चल रही खो-खो की स्टेट चैंपियनशिप में...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 09:36 AM IST
Ujjain News - mp news kho kho39s state championship peeled off 25 players39 knees and elbows without laying the met
65वीं शालेय राज्य स्तरीय क्रीड़ा स्पर्धा के अंतर्गत क्षीरसागर स्टेडियम में चल रही खो-खो की स्टेट चैंपियनशिप में खिलाड़ियों को जमीन पर खेलना पड़ा। उनके लिए मेट तक नहीं बिछाई। जमीन पर खेलने की वजह से पहले ही दिन 25 से ज्यादा खिलाड़ी चोटिल हो गए। अस्थाई चिकित्सा केंद्र पर प्राथमिक उपचार दिया। इसके अलावा खो-खो के चार खिलाड़ियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें माधव नगर अस्पताल भी पहुंचाना पड़ा।

खो-खो को अगस्त 2018 में एशियाई ओलंपिक परिषद ने मान्यता दे दी है। भारतीय पारंपरिक खेलों में खो-खो सबसे ज्यादा खेले जाने वाले खेलों में से एक है। 10 साल पहले तक पूरे प्रदेश और देश के भी अधिकांश राज्यों में खो-खो खाली जमीन पर ही खेला जाता था। डाई लगाकर कूदने और भागने में खिलाड़ियों के घायल होने पर राष्ट्रीय खेल समिति ने इसके लिए मेट को अनिवार्य कर दिया। इसके बाद प्रदेश के कई स्कूलों में खो-खो की प्रैक्टिस मेट पर कराना शुरू किया गया। क्षीरसागर स्टेडियम में चल रही स्टेट चैंपियनशिप में अधिकांश नेशनल खिलाड़ी आए हैं, जिनका कहना है कि स्टेट चैंपियनशिप मेट पर होना चाहिए। अधिकांश खिलाड़ी मेट पर प्रैक्टिस करते हैं। यहां शिक्षा विभाग ने इंतजाम ही नहीं किया।

इन खिलाड़ियों को अस्पताल में भर्ती किया

प्रतियोगिता के दौरान सर्दी-जुकाम और बुखार होने पर एंबुलेंस से रीवा संभाग की पूजा पटेल, सागर के नरेंद्र सिंह और आदिवासी विकास विभाग की मीना को जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां डॉक्टर ने खिलाड़ियों को प्राथमिक उपचार के बाद बॉटल चढ़ाने तक अस्पताल में बेड पर रखा।

खिलाड़ी बोले- मेट पर स्पर्धा के लिए अभ्यास किया था, यहां प्रदर्शन बिगड़ गया

स्टेट चैंपियनशिप में बगैर मेट के खो-खो खेलने पर मजबूर खिलाड़ी।

स्टेडियम खो-खो के लिए बेहतर : खेल शिक्षक ऋतु शर्मा और अनिल निकम ने कहा कि खो-खो नमी वाली जमीन पर ही खेला जाता है। क्षीरसागर स्टेडियम की जमीन में नमी है। खो-खो के खेल के स्टेडियम के मैदान की जमीन बेहतर है। अधिकांश खिलाड़ी अपने सेंटर्स पर बगैर मेट के ही प्रैक्टिस करते हैं।

चोट लगने पर डॉक्टर से उपचार कराती खिलाड़ी रीना।

बचने के लिए डाई लगाई, चोट लग गई

शहडोल के निशी सिंह राजपूत ने बताया वे अपने स्कूल में मेट पर प्रैक्टिस करते हैं। शुक्रवार को खेलते-खेलते ध्यान से निकल गया कि वे खुली जमीन पर हैं। बचने के लिए जैसे ही डाई लगाई तो पैर, कोहनी और हथेली में चोट लगी। शहडाेल की रीना सिंह को भी डाई करने में कोहनी में चोट लग गई।

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