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तीन साल में जारी हिंदी की 200 से ज्यादा पीएचडीथीसिस की होगी जांच, नकल मिली तो उपाधि निरस्त
विक्रम विश्वविद्यालय में अब हिंदी में जमा की गई पीएचडी थीसिस की भी प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर से जांच शुरू हो गई है, जिससे हिंदी की उन 200 से अधिक पीएचडी थीसिस पर संकट हो गया है, जोकि अवार्ड की जा चुकी हैं। अवार्ड हो चुकी हिंदी में लिखी गई इन थीसिस की अब जांच में नकल (साहित्यिक चोरी) का स्तर सामने आ पाएगा। अगर एक निश्चित मापदंड से अधिक नकल पाई गई तो अवार्ड हो चुकी पीएचडी उपाधि को एक समयावधि के लिए निरस्त कर दिया जाएगा।
पीएचडी में साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश पर प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन जांच की जाती है। विश्वविद्यालय में अगस्त 2017 से थीसिस की सॉफ्ट कॉपी की सीडी जांची जाती है लेकिन हिंदी में लिखी गई थीसिस की जांच के लिए विश्वविद्यालय के पास कोई सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं था। जिसके कारण हिंदी में लिखकर जमा करवाई गई थीसिस के साथ एक शपथ पत्र लिया जाता था। इस शपथ पत्र में थीसिस जमा करने वाले शोधार्थी से यह लिखवाया जाता था कि अगर आगे थीसिस में कोई जांच पाई गई तो वह स्वयं जिम्मेदार होंगे। हाल ही में विश्वविद्यालय में हिंदी में लिखित थीसिस की जांच के लिए सॉफ्टवेयर उपलब्ध हो गया है। गुरुवार से ही इसकी जांच शुरू हो गई। एक छात्रा की पहली थीसिस में 4 प्रतिशत नकल सामने आई है। अब संकट यह है कि हिंदी में जिन शोधार्थियों ने थीसिस जमा करवाई थी,
उनमें से 200 से अधिक को पीएचडी अवार्ड हो चुकी है। ऐसे में अगर जांच में नकल सामने आती है तो उनके लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
2017 से जमा की गई हिंदी की सभी थीसिस जांची जाएगी
विक्रम विवि के प्रभारी पुस्तकाध्यक्ष एवं इतिहास व पुरातत्व अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके अहिरवार ने बताया हिंदी में लिखी पीएचडी थीसिस की जांच के लिए अब तक प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर में कोई विकल्प नहीं था। इसलिए शपथ पत्र लेकर थीसिस जमा करवाई गई थी। अब प्लेगरिज्म में हिंदी की थीसिस की भी जांच होगी। 2017 से जमा की गई हिंदी की सभी थीसिस जांची जाएगी। अगर इसमें नकल पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। तय प्रतिशत से अधिक नकल सामने आने पर उपाधि निरस्त करने की अनुशंसा भी करेंगे।