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राष्ट्रीय कृषि बाजार से 600 से अधिक मंडियां लिंक, किसान को मिलेगा बड़ा बाजार
भास्कर संवाददाता | उज्जैन. सरकार तो किसान को कृषि उपज विक्रय के लिए बड़ा बाजार देने जा रही लेकिन 3 सालों में कृषि उपज मंडियों के हालात खराब हो गए। भाव प्रतिस्पर्धा और मल्टी नेशनल कंपनियों का प्रवेश ही इस व्यापार का सुख चैन छीन रहा है। किसानों की कृषि उपज के प्रतिस्पर्धी भाव मिले इसके लिए ई नाम मंडी राष्ट्रीय कृषि बाजार का उदय हो रहा है। देशभर की 600 से अिधक मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार से लिंक की गई है। आॅनलाइन सैंपल आन लाइन आक्शन और आनलाइन पैमेंट वाली ये मंडियां अभी चलन में नहीं आयी है। इस मंडी का प्रचार प्रसार आनलाइन में चल रहा लेकिन किसानों को गांव-गांव जाकर इसका प्रदर्शन नहीं किए जाने से जारगरुकता भी नहीं आ पाई है। सरकार किसान के एक-एक अन्न के दाने का मूल्य दिलाने के लिए तत्पर है। मंडियों में किसानों की उपज बिखेरी ज्यादा जाती है। समेटने वाले भी ट्रॉली के साथ लगे रहते हैं। व्यापारी के तोल कांटों पर भी उपज बिखरी हुई पाई जाती है। मंडियों में 1-2 किलो तो अनाज आसानी से बगैर गलती के बिखर जाता है, लेकिन जानबुझकर तो 3 से 4 किलो अनाज बिखरता है।
गाेल्डन लोकवन गेहूं सस्ता, कम बोया मांग ज्यादा: गोल्डन लोकवन गेहूं इस बार सस्ता मिलना मुश्किल बताया जा रहा है। किसानों ने ज्यादा पैदावार के लिए पोषक मालवराज गेहूं ज्यादा उगाया है। लोकवन कम पैदावार में होने से उत्पादक किसानों को भाव लाभ मिलने की संभावना ज्यादा है। नए गेहूं की अभी तक की आवक में क्वालिटी को लेकर स्थिति साफ नहीं हो रही। लोकवन गेहूं के व्यापारी तो हाेली बाद ही आवक का इंतजार करेंगे। किसान अब जागरूक होकर समय-समय पर ज्यादा फायदा वाले बीज ही खेतों में डाल रहे। मंडी व्यापारी संतोष गर्ग की माने तो गेहूं व्यापार उज्जैन का एक तरफा मांग वाला रहेगा। स्टॉक में इस बार लोकवन गेहूं रखे जाने की खबर है। मिल क्वालिटी में भाव कम हो गए। 1700 रुपए के भाव मिल क्वालिटी के आने लगे। आगे भी व्यापार इसमें बड़ी मंदी वाला ही माना जा रहा है। उज्जैन मंडी में सीजन की सबसे बड़ी आवक होली और रंगपंचमी के बाद होने की संभावना ज्यादा है।