मोरेश्वर राव उलारे | उज्जैन

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Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 05:01 AM IST
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मोरेश्वर राव उलारे | उज्जैन

कुश्ती पर बनी फिल्म दंगल की रियल स्टोरी हमारे शहर में भी है। यहां मुकेश प्रजापति ने अपनी बेटियों को इंटरनेशनल पहलवान बनाने की जिद कर ली है। उनकी जिद को पूरा करने के लिए बेटियां भी पूरी शिद्दत से मेहनत कर रही हैं। सोनीपत में मध्यप्रदेश को बालिका वर्ग में गोल्ड मेडल और हाल ही में खेलो इंडिया में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर प्रियांशी ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। प्रियांशी से बड़ी बहन नुपूर स्कूल और ओपन स्टेट चैंपियन का खिताब जीत चुकी हैं। प्रियांशी की छोटी बहन 12 साल की सृष्टि संभाग केसरी और स्कूल स्टेट में पदक जीत चुकी है।

मुकेश प्रजापत ईंट भट्टे पर काम करते हैं। वे स्वयं अपने जमाने के चर्चित पहलवान थे। कार्तिक मेले में 9 बार संभाग केसरी बनने का रिकार्ड प्रजापति के नाम दर्ज है। स्कूल नेशनल और ओपन नेशनल चैंपियनशिप में भी पदक जीते। वे इंटरनेशनल पहलवान बनकर देश के लिए विश्व चैंपियनशिप खेलना चाहते थे। विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए। शादी के बाद तीन बेटियां हुई तो परिवार के लोग बोले- बेटे होते तो ताकत बढ़ती, उन्हें पहलवान बनाते। इस बात का जवाब वे यह कहकर देते कि मेरी बेटियां बेटों से कम नहीं होंगी। बेटियां बड़ी हुई तो उन्हें पहलवान बनाने के लिए अखाड़े ले गए। पहले ही दिन साथी पहलवानों ने कहा लड़कियों को अखाड़े क्यों लाते हो? वे जवाब देते थे कि इन्हें पहलवान बनाना है। 10 साल पहले जब वे अपनी सबसे बड़ी बेटी प्रतीक्षा को अखाड़े ले गए तो लोगों ने मजाक उड़ाया। प्रतीक्षा भी स्टेट चैंपियनशिप में पदक जीती लेकिन वो डॉक्टर बनना चाहती थी। इसलिए कुछ समय बाद वो अखाड़े से दूर हो गई और वर्तमान में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की छात्रा हैं। मुकेश की दूसरी बेटी नुपूर और तीसरी बेटी प्रियांशी ने नेशनल चैंपियनशिप में पहली बार शामिल होकर महाराष्ट्र में ब्रॉन्ज मेडल जीता। दोनों बहनों की प्रतिभा देख मध्यप्रदेश शासन द्वारा भोपाल खेल अकादमी में चयन कर लिया गया। नुपूर 1 साल पहले कंधे में चोट की वजह से खेल से दूर है लेकिन वो वापसी करने वाली है। प्रियांशी ने सोनीपत में आयोजित नेशनल ओपन कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद जापान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में शामिल होकर चौथे नंबर पर काबिज हुई। हाल ही में प्रियांशी ने खेलो इंडिया में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर केंद्र सरकार की खिलाड़ी को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए वाली योजना में शामिल हो गई है। भविष्य में प्रियांशी का विश्व चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप, कामनवेल्थ अथवा ओलंपिक जैसी विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होना तय है।

ये है “दंगल” की सच्ची कहानी...पिता ने बेटियों को बनाया पहलवान, बड़ी ने स्टेट चैंपियन का खिताब जीता, मंझली खेलो इंडिया में कांस्य पदक ले आईं, छोटी बनी संभाग केसरी

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