पद्मश्री डॉ. मुसलगांवकर को िमली महामहोपाध्याय की उपाधि

Ujjain News - संस्कृत की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले 93 वर्षीय वरिष्ठ संस्कृत विद्वान पद्मश्री डॉ. केशवराव सदाशिव...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:11 AM IST
Ujjain News - mp news padmashree dr mussalgaonkar got the title of mahamahopadhyaya
संस्कृत की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले 93 वर्षीय वरिष्ठ संस्कृत विद्वान पद्मश्री डॉ. केशवराव सदाशिव शास्त्री मुसलगांवकर को अब महामहोपाध्याय की उपाधि से अलंकृत किया गया। राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति ने उन्हें यह उपाधि दी। यह सम्मान उन्होंने भगवान महाकाल को समर्पित किया। उपाधि प्राप्त होने के पांच मिनट बाद ही वे अपने कक्ष में फिर से लेखन के लिए निकल पड़े।

शनिवार शाम इंदौर-उज्जैन फोरलेन स्थित निवास पर विद्यापीठ के कुलसचिव प्रो. जीएसआर कृष्णमूर्ति आैर व्याकरण विभाग के अध्यक्ष व वरिष्ठ आचार्य जे. रामकृष्णन ने पहुंच कर डॉ. मुसलगांवकर को महामहोपाध्याय की उपाधि देकर सम्मानित किया। डॉ. शास्त्री को 9 फरवरी को होने वाले विद्यापीठ के 22वें दीक्षांत समारोह में यह उपाधि दी जाना थी लेकिन उस समय मौसम खराब होने की वजह से वे समारोह में नहीं जा सके थे। वैदिक मंगलाचरण के बीच शाॅल-श्रीफल आैर महामहोपाध्याय की उपाधि दी गई। डॉ. मुसलगांवकर की प|ी प्रमिला देवी, पुत्र एवं विक्रम विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर, महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के सचिव डॉ. वीरूपाक्ष वी. जड्‌डीपाल, विक्रम विवि के डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. कनिया मेडा, डॉ. एसके मिश्रा, डॉ. डीडी बेदिया सहित संस्कृतविद् उपस्थित रहे।

डाॅ. मुसलगांवकर को महामहोपाध्याय की उपाधि देते विद्यापीठ के कुलसचिव।

संस्कृत में रची 14 पुस्तकें, अब लिख रहे आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास

पांच दशकों तक शिक्षक के रूप में सेवाएं दे चुके पद्मश्री डॉ. मुसलगांवकर अब तक संस्कृत की सेवा करते हुए 14 पुस्तकें लिख चुके हैं। उम्र के साथ श्रवण व दृष्टि शक्ति कुछ कमजोर हुई है लेकिन उनके लेखन का कार्य आज भी युवाओं की तरह रफ्तार से चल रहा है। वर्तमान में वे आधुनिक संस्कृत साहित्य का इतिहास विषय पर लिख रहे हैं। इसके अलावा योग सूत्र महा भाष्य के 2 हजार पृष्ठों में व्याख्यान कर चुके हैं। डॉ. मुसलगांवकर 2007 से उज्जैन में ही आकर बस गए हैं।

पिछले साल मिला था पद्मश्री, दूसरे पुरस्कारों की भी लंबी सूची

संस्कृत में योगदान के लिए ही भारत सरकार ने डॉ. मुसलगांवकर को वर्ष 2018 में पद्मश्री से अलंकृत किया है। उत्तरप्रदेश सरकार का संस्कृत के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान विश्व भारती भी उन्हें 2017 में दिया जा चुका है। 2008 में भी संस्कृत में निपुणता तथा शास्त्र में पांडित्य के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा सम्मानित किया गया। वर्ष 2013 में उन्हें मप्र सरकार द्वारा महाकवि कालिदास पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

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