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पूजा-पाठ की भाषा नहीं संस्कृत, इसमें अणु-परमाणु व अंतरिक्ष विज्ञान के गूढ़ रहस्य- डॉ.मुसलगांवकर

Ujjain News - सोमवार दोपहर अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र का चतुर्थ उद‌्घाटन एवं तृतीय संपूर्ति समारोह हुआ। इंजीनियरिंग...

Feb 18, 2020, 09:35 AM IST
Ujjain News - mp news sanskrit is not the language of worship it contains the deepest secrets of atomic and atomic science dr musalgaonkar

सोमवार दोपहर अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण केंद्र का चतुर्थ उद‌्घाटन एवं तृतीय संपूर्ति समारोह हुआ। इंजीनियरिंग कॉलेज के विश्वेश्वरैया सभागृह में संस्कृत विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विक्रम विवि की संस्कृत अध्ययनशाला के अध्यक्ष डॉ.राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने कहा- संस्कृत सिर्फ पूजा-पाठ की भाषा नहीं है। इसके अणु-परमाणु, अंतरिक्ष विज्ञान, शल्य चिकित्सा के गूढ़ रहस्य हैं। संस्कृत की ज्ञान-विज्ञान परंपरा विषय की व्याख्या करते हुए डॉ.मुसलगांवकर ने कहा- 5000 साल पहले हमारे ग्रंथ नाल से शरीर के अंग निर्माण की विधि बताते हैं, विज्ञान ने इसे अब खोजा। हमने नौ ग्रह बताए, 90 साल की खोज के बाद भी विज्ञान आठवां ग्रह स्वीकार नहीं कर पाया। अध्यक्षता इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राचार्य प्रो.अतुल स्थापक ने की। विशेष रूप से पूर्व प्राचार्य डॉ.उमेश पेंढारकर, डॉ.रवि नगाइच मंचासीन थे।

चार साल में इतने विद्यार्थी

साल प्रथम लेवल द्वितीय लेवल

2017 166 --

2018 95 27

2019 98 29

2020 94 25

सरल संस्कृत के लिए यू-ट्यूब चैनल शुरू

केंद्र संचालक आचार्य देवकरण शर्मा ने बताया पिछले साल की घोषणा अनुसार संस्कृत ज्ञान के लिए यूट्यूब चैनल शुरू किया
है। लोग संस्कृत क्लासेस बाय आचार्य डीके शर्मा सर्च कर यह देख सकते हैं।

यह सुझाव भी आए

1. विद्यार्थी दिलीप भारद्वाज ने मांग की कि प्रत्येक जिले में ऐसा संस्कृत केंद्र खोला जाएं।

2. आचार्य शर्मा ने आह्वान किया कि विद्यार्थी गांवों में जाकर आम लोगों को संस्कृत ज्ञान दें।

विद्यार्थी बोले- श्लोक सीखे तो जिंदगी बदल गई

प्रथम लेवल परीक्षा में रजनीश दिसावल प्रथम, मेनका कुरील द्वितीय और समता झांझरी तृतीय रहीं। द्वितीय लेवल परीक्षा में सुनील कुमार प्रथम, दुष्यंत त्रिवेदी द्वितीय और मोहनलाल कंठाली तृतीय रहे। अपने अनुभव सुनाते हुए दिसावल ने बताया वे इंजीनियर है। कई साल विदेश में रहे। बेटे को संस्कृत पढ़ाने के लिए खुद सीखी और इतनी रुचि बढ़ी कि कक्षा में प्रवेश ले लिया। साध्वी समता झांझरी ने कहा- जैन ग्रंथ प्राकृत भाषा में हैं, इन्हें समझने के लिए संस्कृत सीखी। रंगकर्मी मनीषा व्यास, राजेंद्र चावड़ा, कथाकार महेश कुशवाह ने भी अपने अनुभव सुनाए। संचालन केंद्र संचालक आचार्य देवकरण शर्मा राजस्थान वाले ने किया। अभार डॉ.कंजन उपाध्याय ने माना।

केंद्र की प्रथम लेवल परीक्षा में इंजीनियर रजनीश दिसावल अव्वल रहे। उन्हें पुरस्कृत करते अतिथि डॉ.मुसलगांवकर, प्रो.स्थापक व डॉ. नगाइच।

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