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मिट्टी की जांच और 50 साल की बारिश से तय होगा रुद्रसागर का विकास
शहर के सप्त सागरों का विकास करने के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी विशेषज्ञों की सलाह ले रही है। इसी क्रम में दिल्ली के लेक एक्सपर्ट मनु भटनागर ने रुद्रसागर का अवलोकन किया है। उन्होंने इसके विकास की योजना बनाने के लिए सुझाव भी दिए हैं। सुझाव के आधार पर स्मार्ट सिटी कंपनी प्रोजेक्ट तैयार करेगी। कंपनी अन्य प्राचीन सागरों की भी एक्सपर्ट से अवलोकन कराएगी। भटनागर ने शिप्रा का भी अवलोकन किया है। शिप्रा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए भी उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं। जिन पर स्मार्ट सिटी बोर्ड विचार करेगा।
शहर के पौराणिक सप्त सागरों के विकास के लिए स्मार्ट सिटी कंपनी ने अपने विशेषज्ञों के माध्यम से प्राथमिक रिपोर्ट तैयार कराई है। इसमें इनके भौतिक विकास, सौंदर्यीकरण तथा यहां पर्यटन सुविधाओं के लिए सुझाव दिए हैं। इस मामले में यह भी सुझाव दिया गया था कि लेक एक्सपर्ट से इनके मौलिक विकास को लेकर सुझाव लिए जाना चाहिए। इसी क्रम में दिल्ली के लेक एक्सपर्ट मनु भटनागर ने रुद्रसागर और शिप्रा का भ्रमण किया। रुद्रसागर का विकास महाकाल-रुद्रसागर प्रोजेक्ट के तहत किया जाना है। कंपनी ने रुद्रसागर के किनारे घाट विकसित करने, वहां लेजर शो, लाइट एंड साउंड शो, रुद्रसागर में साफ जल का बंदोबस्त करने की तैयारी की है। घाट का निर्माण चल रहा है। इसके किनारे पब्लिक प्लाजा, शिव कॉरिडोर, फेसिलिटी सेंटर-2 का निर्माण भी किया जा रहा है।
बड़ा तालाब एक्टिविटी के लिए, छोटा प्राकृतिक सरोवर
एक्सपर्ट की राय है कि बड़े रुद्रसागर को एक्टिविटी के लिए तैयार किया जाना चाहिए लेकिन छोटे रुद्रसागर को प्राकृतिक तालाब के रूप में विकसित किया जा सकता है। दोनों रुद्रसागर में पानी का आवागमन रखा जाना चाहिए, यानी दोनों को मिलाना चाहिए। छोटे रुद्रसागर के किनारे हरसिद्धि मंदिर के सामने की दुकानों को हटा कर वहां सौंदर्यीकरण कराने, रुद्रसागर के बीच छोटा टापू विकसित करना जहां पक्षियों का बसेरा हो सके, इसके आसपास पौधारोपण, साफ पानी का बंदोबस्त करना होगा। रुद्रसागर में से जा रही सीवरेज लाइनों को हटाना व नाले बंद करना जरूरी है। रुद्रसागर में लगे बिजली के खंभे, हाईमास्ट भी हटाने को कहा है। सरोवर में उत्पन्न होने वाली जलकुंभी को हटाने की व्यवस्था भी करना होगी।
एक्सपर्ट बोले- शिप्रा में कान्ह का पानी आना बंद करें
शिप्रा को लेकर एक्सपर्ट भटनागर ना सुझाव है कि इसमें कान्ह के प्रदूषित पानी को आने से रोकना जरूरी है। यह पवित्र नहीं है, इसलिए इसमें कान्ह के पानी को ट्रीटमेंट कर छोड़ने पर भी आपत्ति ली जा सकती है। स्मार्ट सिटी सीईओ प्रदीप जैन के अनुसार एक्सपर्ट ने रुद्रसागर का अवलोकन कर सुझाव दिए हैं। अधीक्षण यंत्री धर्मेंद्र वर्मा कहना है कि अन्य सागरों का अवलोकन भी एक्सपर्ट को कराया जाएगा। हमें सभी सागरों का विकास करना है।
रुद्रसागर के भीतर तीन बोरिंग कराएंगे
रुद्रसागर प्राकृतिक रूप से विकसित हो इसके लिए मनु भटनागर ने लेक बेसिन और लेक बेड सर्व कराने को कहा है। इससे पता चलेगा रुद्रसागर में कितनी जल क्षमता है और गहराई क्या है। दो तरह के टेस्ट कराएंगे इसमें मिट्टी का परीक्षण होगा जिससे मिट्टी कैसी है यह पता चलेगा। दूसरा पानी की जांच होगी इसमें सरफेस वाटर यानी जो पानी भरा हुआ है, वह कैसा है तथा दूसरा ग्राउंड वाटर जांच, इससे पता चलेगा यहां भू-जल की स्थिति क्या है। क्षेत्र में 50 साल के बारिश के आंकड़े भी निकालेंगे। इन सर्वे और जांच में एक महीने से ज्यादा समय लगेगा। रिपोर्टर्स आने के बाद विकास के लिए और क्या किया जाना चाहिए, यह तय होगा।
रुद्रसागर में गर्मी में पानी कम हो जाता है, यहां हमेशा पानी भरा रखने की योजना है।