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विद्यार्थी काल चरित्र निर्माण का श्रेष्ठतम समय- नौटियाल

2 वर्ष पहले
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उज्जैन| वैदिककालीन शिक्षा पद्धति का व्यापक उद्देश्य शिक्षार्थियों को सभ्य और उन्नत बनाकर उनका सर्वांगीण विकास करना था। नैतिक शिक्षा में विद्वान बनने के पूर्व चरित्रवान बनना आवश्यक था। विद्यार्थीकाल चरित्र निर्माण का श्रेष्ठतमय समय है। उस समय की शिक्षा का आधार पुस्तकीय ज्ञान नहीं था। यह बात महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान की ओर से शनिवार को भरतपुरी में आयोजित व्याख्यान में आचार्य पं. सौरभ नौटियाल ने कही।





शिक्षार्थी चंद्रप्रकाश नागर ने बताया इस अवसर पर पं. अनूप मिश्र, नवनीत मेहता, पर्यावरणविद् जेपी चतुर्वेदी, महेशचंद्र सोनी, सुरेंद्र चावड़ा मौजूद थे।



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