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कलेक्टर की जुबानी, सात दिन में शिप्रा के लबालब होने की कहानी...

Ujjain News - शशांक मिश्रा, कलेक्टर | उज्जैन सात जनवरी को अचानक पता चला कि उज्जैन कलेक्टर के रूप में काम संभालना है, वह भी आज ही।...

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 05:01 AM IST
Ujjain News - mp news the collector39s gesture the story of shipra39s disappearance in seven days
शशांक मिश्रा, कलेक्टर | उज्जैन

सात जनवरी को अचानक पता चला कि उज्जैन कलेक्टर के रूप में काम संभालना है, वह भी आज ही। मैं परिवार के साथ ताबड़तोड़ उज्जैन के लिए रवाना हो गया। सबसे पहले भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। फिर दफ्तर जाकर काम संभाला और वहीं पर अफसरों की बैठक ली। यह जानने के लिए उत्सुक था कि शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट तक पानी क्यों नहीं आया। कारण जानने में दो दिन बीत गए। तब समझ आया कि इंटर डिपार्टमेंट को-ऑर्डिनेशन की कमी के कारण ये समस्या आई। विभाग के पास प्लान टू भी तैयार नहीं था।

समस्या पकड़ में आने के बाद प्लानिंग की। कैसे नर्मदा का पानी आसानी से उज्जैन पहुंच सकता है। इसमें सबसे बड़ी बात थी, इंदौर और देवास जिले से भी को-ऑर्डिनेशन करना था। एनवीडीए, पीएचई, नगर निगम, जल संसाधन, पुलिस सभी से बातचीत से प्लानिंग तैयार हुई। इंदौर से कितना पानी छोड़ा जा सकता है, कितने समय में देवास के शिप्रा डेम में आएगा, कितना जमा होगा, कितने दिन लगेंगे कई सारे सवालों के साथ प्लानिंग को अंतिम रूप दे दिया। प्लानिंग के अनुसार एनवीडीए से सभी चार पंप चलवाकर पानी इंदौर के उद्गम स्थल से देवास के शिप्रा डेम पहुंचाने और वहां से उज्जैन में त्रिवेणी स्टापडेम लाने की कार्ययोजना तय की।

इस योजना के तीन मुख्य बिंदू थे- समय प्रबंधन, विभागों में तालमेल और मॉनिटरिंग। कलेक्टर के रूप में अन्य काम भी करना थे, इसलिए मोबाइल पर सभी के साथ संपर्क में रहे। देवास डेम से छोड़ा पानी कहीं रास्ते में रुके नहीं इसलिए सबसे ज्यादा जरूरत सुरक्षा की थी। स्टापडेमों पर राजस्व और पुलिस कर्मियों की तैनाती, पीएचई के इंजीनियर्स से स्टापडेम खुलना, नदी में से पानी खींचने वाली मोटरों को हटवाना, यह सब एक साथ चला। सबसे अच्छी बात यह थी कि हर विभाग ने अपनी जिम्मेदारी ताकत से निभाई। उच्च अधिकारियों ने काम को आसान बनाया। नतीजा सामने है। रविवार को इतना पानी आ गया कि डेम के गेट बंद कराने पड़े। अब 4 फरवरी को सोमवती अमावस्या के स्नान के लिए देवास डेम में पानी एकत्र किया जाएगा।

नर्मदा का जल लाने के मिशन से बहुत सीखने को मिला। खासकर स्टापडेमों को कैसे ऑपरेट करते हैं, कैसे को-ऑर्डिनेशन से लक्ष्य हासिल किया जाता है। इस पूरे अभियान का डाक्यूमेंटेशन भी कर रहा हूं। एक कार्ययोजना तैयार कर रहा हूं ताकि हर स्नान पर्व पर समय रहते तैयारी की जा सके।

पहले दो दिन समझने में लगे, फिर चार दिन समय प्रबंधन, अफसरों से तालमैल और मॉनिटरिंग में झोंकी ताकत, अब इतना पानी आ गया कि गेट बंद करने पड़े

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