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देश नहीं बनता है ईंटों, मिट्‌टी, रेत के मकानों से, मां का मस्तक ऊंचा होता है बेटों के बलिदानों से- वाजपेयी

एक वर्ष पहले
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देश नहीं बनता है इट्‌टी-गिट्‌टी-रेत मकानों से, मां का मस्तक ऊंचा होता है, बेटों के बलिदानों से...। लखनऊ के कवि वेदव्रत वाजपेयी की वीर रस की इन पंक्तियों पर सोमवार रात मालीपुरा तालियों से गूंज उठा।

होली के उपलक्ष्य में मालीपुरा सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में सोमवार रात मालीपुरा में हुए 73वें अखिल भारतीय सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने हास्य-व्यंग्य, वीर आैर शृंगार रस की रचनाओं के साथ वर्तमान हालातों पर भी रचना पाठ किया। वाजपेयी के अलावा घनश्याम अग्रवाल (हास्य रस, अकोला), शांति तूफान (हास्य रस, निम्बाहेड़ा), अखिलेश द्विवेदी (हास्य रस, इलाहबाद), सुमित्रा सरल (गीत-गजल, बड़ौदा), अर्जुन हल्लड़ (हास्य रस, सोजत), राम भदावर (वीर रस, इटावा), दमदार बनारसी (हास्य रस, बनारस), पार्थ नवीन (प्रतापगढ़) आैर तिलक राज सोलंकी (उज्जैन) ने रचना पाठ किया। सूत्रधार कवि अशोक भाटी (उज्जैन) थे। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कवि वाजपेयी को मालवा र| से सम्मानित किया गया। संरक्षक सत्यनारायण चौहान, अध्यक्ष देवेंद्र गेहलोत, सचिव राकेश चौहान ने उन्हें सम्मानित किया। कवि सम्मेलन के लिए 2500 किलोग्राम फूलों से मालीपुरा को सजाया गया। यह फूल बैंगलुरु आैर इंदौर से मंगवाए गए। मंच पर फूलों से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की आकृति बनाई आैर पूरे मालीपुरा में फूलों के 25 झूमर भी लगाए गए।

कवियों ने यह भी सुनाई रचनाएं : पीते हैं तो तबीयत खराब होती है, नहीं पीते तो नीयत


> घनश्याम अग्रवाल (अकोला) - बेताल के इस सवाल पर विक्रम से लेकर अन्ना-मोदी सभी मौन हैं, जब सारा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ है तब साला भ्रष्टाचार करता कौन है।

> अशोक भाटी (उज्जैन) -

पीते हैं तो तबीयत खराब होती है, नहीं पीते तो नीयत खराब होती है। एक दिन पीते, एक दिन नहीं पीते, न तबीयत न नीयत खराब होती है।

> दमदार बनारसी (बड़नगर) - इस बार होली में ये मिल के कसम खायें, एक मजबूत भाईचारा हम निभाएंगे। सही मायने में तभी विश्व गुरु हो सकेंगे, पत्थर नहीं जी हम लेखनी चलाएंगे।

- पार्थ नवीन (प्रतापगढ़) -

जय आैर वीरू स्टेशन पर छूट गई राजधानी, गजब की होरी खेले राजधानी। शाहीन बाग में बाजीराव को ढूंढ रही मस्तानी, गजब की होरी खेले राजधानी।

छात्र तिलक ने सुनाया - जय जय भारत के उद्घोषों से दुश्मन सारे दूराक्रांत रहेंगे...

कवि सम्मेलन में एक खास बात यह भी रही कि इसमें मात्र 16 वर्षीय तिलक राज तिलक (तिलक राज सोलंकी) ने भी रचना पाठ किया। तिलक 12वीं कक्षा के छात्र हैं एवं पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी के पुत्र हैं। तिलक ने स्वरचित महाकाल स्तुति सुनाने के अलावा दिल्ली के हालातों पर रचना पढ़ते हुए कहाकि - क्या थम जाएगी नई दुनिया दिल्ली के इन दंगों से, क्या न उठेगा उद्गार साहित्य के इन सतरंगों से, नहीं-नहीं अब हम-तुम कैसे शांत रहेंगे, जय-जय भारत के उद्घोषों से दुश्मन सारे दूराक्रांत रहेंगे....।

10 बजे तक की अनुमति, 10.15 बजे सम्मेलन शुरू

परीक्षाओं के मद्देनजर जिला प्रशासन ने धारा-144 लागू की है। जिसमें ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। एसडीएम (उज्जैन शहर) राकेश मोहन त्रिपाठी ने बताया कवि सम्मेलन के लिए आयोजन समिति को प्रतिबंधात्मक आदेश के अंतर्गत सशर्त अनुमति दी गई है।
वे रात 10 बजे बाद ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।
स्थिति यह रही कि सम्मेलन ही रात 10.15 बजे शुरू हुआ। समिति के सचिव राकेश चौहान ने बताया यह पारंपरिक आयोजन है। प्रशासन से हमें सशर्त अनुमति प्राप्त हुई है। इसलिए साउंड की आवाज रात होने के बाद कम करवा दी गई।

मालीपुरा में आयोजित अभा कवि सम्मेलन में रचना पाठ करते कवि दमदार बनारसी।
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